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Thursday, January 3, 2019

रत्नाभूषण निर्यातकों को 1 जनवरी से सोने की आपूर्ति पर 3 प्रतिशत आईजीएसटी से छूट


GJEPC on IGST exemption to gold export


मुंबई। रत्नाभूषण उद्योग को महत्वपूर्ण रूप से राहत देते हुए, केंद्र सरकार ने शीर्ष निकाय - जेम ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) द्वारा नामित एजेंसियों द्वारा सोने के सामानों के निर्यातकों को किये जा रहे सोने की आपूर्ति पर आईजीएसटी से छूट देने की मांग को मंजूरी दे दी है। जीएसटी काउंसिल ने हाल ही में घोषणा की कि रत्नाभूषण निर्यातकों को 1 जनवरी, 2019 से नामित एजेंसियों (बैंकों) को 3 प्रतिशत आईजीएसटी नहीं देना होगा।
जीजेईपीसी के चेयरमैन,  प्रमोद कुमार अग्रवाल ने कहा, ‘‘हम सरकार द्वारा उठाये गये इस कदम की सराहना करते हैं। कस्टम्स ट्रैफिक ऐक्ट, 1975 (1975 का 51) के पहले शेड्युल के हेडिंग 7108 में आने वाले सोने की अंतरा-राज्यीय आपूर्ति को छूट देना सार्वजनिक हित में आवश्यक है, जब ‘‘नामित एजेंसी द्वारा आपूर्ति पर निर्यात’’ के लिए स्कीम के तहत नामित एजेंसी द्वारा आपूर्ति की जाती है। हमें चांदी और प्लेटिनम के सामानों के निर्यातकों के लिए भी शीघ्र ही सरकार द्वारा ऐसी राहत की उम्मीद है। अग्रवाल ने आगे बताया, ‘‘आईजीएसटी के अग्रिम भुगतान और बैंक गारंटी के रूप में आयात शुल्क, अधिक ब्याज, दावा वापसी के अनुपालन की कठिनाइयों के चलते अनेक छोटे एवं मझोले आभूषण निर्माताओं की भारी कार्यशील पूंजी अवरूद्ध हो गई थी, जिससे उनके कारोबारी परिचालन एवं वैश्विक प्रतिस्पर्द्धी क्षमता प्रभावित हो रही थी।’’
जीएसटी  के क्रियान्वयन और सोने पर 3 प्रतिशत आईजीएसटी के बाद, इंडस्ट्री ने नामित एजेंसियों द्वारा निर्यातकों को सोने की आपूर्ति पर आईजीएसटी से छूट देने के लिए अनुरोध किया था। उसके बाद, भारत सरकार ने अधिसूचना संख्या 77/2017 - कस्टम्स तिथि 13.10.2017 के जरिए विनिर्दिष्ट बैंकों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (नामित एजेंसियों) को सोने पर आयात से आईजीएसटी के भुगतान से छूट दे दी थी, लेकिन इससे आभूषण निर्यातकों को लाभ नहीं मिल पाया था, चूंकि उन्हें अभी भी आईजीएसटी/जीएसटी का अग्रिम भुगतान करना पड़ता था और निर्यात के आभूषण के निर्माण के उद्देश्य हेतु सोने की खरीद पर लगभग 10 प्रतिशत बेसिक आयात शुल्क देना पड़ता था।
जीजेईपीसी, जीएसटी से जुड़े प्रमुख लंबित मुद्दों को लेकर भी आगे बढ़ रही है।
इनवर्टेड कर दर संरचना के चलते इनपुट टैक्स क्रेडिट (‘आईटीसी’) के ब्लॉकेज के संबंध में। 
25 जनवरी, 2018 से, कटे और पॉलिश किये गये हीरों एवं रत्नों पर जीएसटी दर 3 प्रतिशत से घटकर 0.25 प्रतिशत हो गया है, जबकि जीएसटी दर 5 प्रतिशत (जॉब वर्क चार्ज)/18 प्रतिशत (अन्य) इनपुट सेवाओं पर लागू है, जिससे घरेलू आपूर्तियों के रूप में आईटीसी का संचय होगा।
जीजेईपीसी की सिफारिशें
हीरे/रंग-बिरंगे रत्न/उपरत्नों के लिए समूची मूल्य श्रृंखला में 0.25 प्रतिशत का सिंगल जीएसटी कर दर रिजाइम।
कंसाइनमेंट आधार पर किये गये निर्यात (विदेशी प्रदर्शनी, एक्सपोर्ट प्रोमोशन टूर आदि सहित)
चूंकि विदेशी प्रदर्शनियों, एक्सपोर्ट प्रोमोशन टूर्स के लिए कंसाइनमेंट के रूप में भेजे जाने वाले सामान आपूर्ति नहीं है, इसलिए इस तरह के उद्देश्य के लिए निर्यात की जाने वाली वस्तुओं/वापस आयात की जाने वाली वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगना चाहिए।
जीजेईपीसी की सिफारिशरू प्रदर्शनी/एक्सपोर्ट प्रोमोशन टूर्स के जरिए रत्न एवं आभूषण के कंसाइनमेंट आयात और निर्यात के लिए छूट दिये जाने के संबंध में जारी किये जाने हेतु स्पष्टीकरण
निर्धारित अवधि के लिए इनपुट पर इनवर्टेड शुल्क संरचना के चलते संचयी कर जमा की वापसी
इनवर्टेड शुल्क संरचना छोड़ने के लिए दाखिल किये गये धनवापसी दावों के रूप में, काफी राशि संचित हो गई है, जिससे हीरे/रंगबिरंगे रत्न निर्यातकों की पूंजी अवरूद्ध हो गई है।
जीजेईपीसी की सिफारिशः दर परिवर्तन की तिथि तक रखे गये कथित उत्पादों के स्टॉक के संबंध में संचित आईटीसी की वापसी की अनुमति के लिए आवश्यक निर्देश जारी किये जाने चाहिए।
उपर्युक्त मुद्दों के अलावा, जीजेईपीसी ने आभूषण के निर्माण एवं निर्यात के लिए कंसाइनमेंट आधार पर सोने के आयात संबंधी मामलों को भी उठाया है।

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