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Wednesday, March 13, 2019

आसक्‍त जीवनशैली के कारण राज्‍य में क्रॉनिक किडनी डिजीज के बढ़ रहे हैं मामले



Chronic kidney disease increasing States

जयपुर। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पतालजयपुर के चिकित्‍सकों ने आगाह किया है कि राजस्थान की एक तिहाई से अधिक आबादी को आसक्‍त जीवनशैली अपनाने के कारण क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) होने का खतरा बढ़ा है। राज्य में उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मामले बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण (एनएफएचएस 4) के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में 12.8 प्रतिशत लोग उच्च रक्त शर्करा से ग्रसत हैंजबकि 19.3 प्रतिशत लोग उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से ग्रस्‍त हैं। एक साथ, दोनों 32% आबादी को सीकेडी (क्रोनिक किडनी डिजीज) की चपेट में लाते हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा डॉ. राजेश कुमार गार्सा ने किया।

''उच्च रक्तचाप और उच्च रक्त शर्करा के मामलों में पिछले 5 सालों में वृद्धि हुई है, इसके लिए मुख्य रूप से शारीरिक गतिविधि में कमी और पैकेट बंद भोजन और पेय पदार्थों के रूप में परिष्कृत चीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने की वजह से। वास्तव मेंउच्च रक्तचाप गुर्दे की विफलता का दूसरा प्रमुख कारण हैजबकि अनावश्यक दर्द निवारक दवाओं का सेवन भी किडनी को नुकसान पहुंचाने का प्रमुख कारण है। जिन्‍हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप का पारिवारिक इतिहास हैउन्हें विशेष रूप से इसके प्रति सावधान रहना चाहिए और 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से सख्त निगरानी करनी चाहिए। इस वर्षविश्व किडनी दिवस की थीम 'किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरीह्वेयरहैजो उच्च और बढ़ते किडनी रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और ट्रांसप्लांट डोनेशन को बढ़ाने के लिए निर्धारित है।'' ये बातें डॉ. राजेश कुमार गार्साकंसल्‍टेंट नेफ्रोलॉजीफोर्टिस एस्‍कॉर्ट्स हॉस्‍पीटलजयपुर ने कहीं।

मधुमेह से ग्रस्‍त लोगों मेंशरीर में मौजूद रक्त वाहिकाएं उच्‍च मात्रा में शुगर की मौजूदगी के कारण क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैंजो रक्‍त के शुद्धीकरण को प्रभावित करती हैंजो कि किडनी का प्रमुख काम है। ऐसे मेंशरीर इसकी जरूरत से अधिक मात्रा में नमक और पानी का अवशोषण करने लगता हैजिसके परिणामस्‍वरूप वजन बढ़नाटखने की सूजन और मूत्र में प्रोटीन की मात्रा बढ़ने की समस्‍या होने लगती है। मधुमेह उन नसों को भी नुकसान पहुंचाता है जो मूत्राशय को खाली करने की प्रक्रिया को भी मुश्किल बना सकती है। इसका परिणाम सीधे तौर पर किडनी पर पड़ता है और उसकी क्रियाशीलता प्रभावित होती है। अनुमान के मुताबिकटाइप1 डायबिटीज वाले लगभग 30 प्रतिशत मरीज और टाइप2 डायबिटीज वाले 40 से 50 प्रतिशत लोगों में अंततः किडनी फेल होने की संभावना रहती है।

दूसरी तरफ उच्च रक्तचापरक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और धमनियों की दीवारों को मोटा या संकरा बनाता है। यह रक्त को फ़िल्टर (साफ) करने वाले नेफ्रॉन में पोषक तत्वों और ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित करता है - प्रत्येक नेफ्रॉन अपने रक्त की आपूर्ति छोटे बालों जैसे केशिकाओंसभी रक्त वाहिकाओं में सबसे छोटी कोशि‍काओं के माध्यम से प्राप्त करता है। लंबे समय तक और अनियंत्रित उच्च रक्तचाप गुर्दे के आसपास की धमनियों को संकीर्णकमजोर या कठोर बना सकता है और एल्डोस्टेरोनशरीर में रक्तचाप को विनियमित करने में मदद करने के लिए स्वस्थ गुर्दे द्वारा उत्पादित हार्मोनके उत्पादन से किसी अंग को क्षतिग्रस्‍त कर सकता है।

नियमित रूप से जांच कराने की सलाह देने के साथ, डॉ. गार्सा ने बातें भी कहीं, शरीर में सूजनरात में बार-बार बाथरूम जानाकमजोरी,भूख का बढ़ना, मतली या उल्टीखुजलीबार-बार संक्रमण और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव जैसे संकेतों को देखें- ये गुर्दे की क्षति के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। डायबिटीज या उच्च रक्तचाप से ग्रस्‍त किसी व्‍यक्ति को साल में कम से कम एक बार रक्तमूत्र और रक्तचाप की जांच जरूर करवानी चाहिए। ब्लड ग्लूकोज के स्तर की घर पर निगरानी करनाघर पर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना और इसके प्रति जागरुक रहना और इन परिस्थितियों में उपयुक्त आहार का सेवन करना इससे बचाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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