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Tuesday, April 2, 2019

डॉ. फिक्सिट के नए कैम्पेन में अमिताभ बच्चन ने दी सलाह, ’ऑक्टोपस मत बनिए!’



  Dr. Fixit unveils new campaign featuring Mr Amitabh Bachchan

मुंबई . पिडिलाइट परिवार के उत्पाद डॉ. फिक्सिट ने   अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ-साथ कछुए जैसे जलीय जीवों के प्रतीकों की विशेषता वाले अपने नए दिलचस्प टीवी कॉमर्शियल कैम्पेन का अनावरण किया। टीवी विज्ञापन अपने नए घर के निर्माण के दौरान घर के मालिकों से एक शॉर्टकट लेने से बचने की बात करते हुए अपने घर को डॉ. फिक्सिट के साथ ’टोटल वॉटरप्रूफ’ करने का आग्रह करता है ताकि भविष्य की लागत और घर के नुकसान से बचा जा सके।
डॉ. फिक्सिट के टीवी विज्ञापनों की खासियत यह भारतीय उपभोक्ताओं को अपने हल्के-फुल्के और मजेदार अंदाज में नया घर बनाने के दौरान वॉटरप्रूफिंग के बारे में जागरूक करते हैं। नया टीवीसी कैम्पेन भी इस दृष्टिकोण पर खरा उतरेगा, जिसमें मिस्टर बच्चन अपने खास अंदाज और हाजिरजवाबी से चार चांद लगा रहे हैं।
नया डॉ. फिक्सिट कैम्पेन वॉटरप्रूफिंग के मामले में उन शॉर्टकट्स पर ध्यान दिलवाता है जो लोग आमतौर पर अपने घरों का निर्माण करते समय लेते हैं। ज्यादातर लोग एक नया घर बनाते समय, वॉटरप्रूफिंग का काम दूसरों पर छोड़ देते हैं या इस ओर ध्यान ही नहीं देते बल्कि कभी-कभार तो इसे अनावश्यक खर्च भी मान लिया जाता है। टीवीसी इस तथ्य को रेखांकित करता है कि वॉटरप्रूफिंग को छोडऩा, आगे चल कर और भी ज्यादा खर्च करवा सकता है क्योंकि रिसाव और नमी घर को निश्चित तौर पर नुकसान पहुंचाएगी। टीवीसी बताता है कि कैसे डॉ. फिक्सिट की ’टोटल वॉटरप्रूफिंग’ आपके घर और आपके निवेश की सुरक्षा करने के साथ-साथ भविष्य में पेश आने वाली अप्रत्याशित शर्मिंदगी से भी बचा सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह उपभोक्ता को डॉ. फिक्सिट ब्रांड तक पहुंचने का आग्रह करता है, ताकि वे विस्तृत ’वॉटरप्रूफिंग गाइड’ प्राप्त कर सकें। यह उन्हें वॉटरप्रूफिंग उत्पादों और सेवाओं पर जानकारी देता है और वह भी बहुत आसान तरीके से।
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर  विवेक शर्मा कहते हैं, ’वॉटरप्रूफिंग सेगमेंट में डॉ. फिक्सिट मार्केट लीडर है और यह वॉटरप्रूफिंग को एक जरूरी तत्व बनाने के क्षेत्र में निरंतर योगदान देता रहेगा। नए घरों का निर्माण करने वाले लोग वॉटरप्रूफिंग करवाने की मंशा तो रखते हैं लेकिन अक्सर वे यह काम दूसरों पर छोड़ देते हैं, कभी-कभी इसकी अनदेखी भी करते हैं या खर्च के नाम पर इसमें कटौती करने की गलती करते हैं।  बच्चन और जलीय जीवों के साथ हास्य-व्यंग्य की विशेषता वाले इस टीवीसी कैम्पेन का उद्देश्य लोगों को डॉ. फिक्सिट के साथ ’टोटल वॉटरप्रूफिंग’ की तरफ बढ़ाना है। लोगों के रवैये को बदलने में मिस्टर बच्चन की भूमिका भी बहुत काम की साबित हो रही है।
कैम्पेन पर टिप्पणी करते हुए,  पीयूष पांडे (चीफ क्रिएटिव ऑफिसर वर्ल्डवाइड और एक्जीक्यूटिव चेयरमैन इंडिया) ने कहा, ’सामान्य रूप से होता है कि आप किसी को बहुत सारी जानकारी से लाद दें लेकिन इसके बाद भी उसका व्यवहार नहीं बदलता जबकि यही जानकारी एक व्यावहारिक और भावनात्मक तरीके से दी जाए तो उनके दृष्टिकोण में बदलाव लाया जा सकता है। दिलचस्प टीवीसी की इस सीरीज में, ओगिल्वी और कॉर्कोइस टीम ने शानदार जलीय पात्रों और हास्य के माध्यम से इसे उजागर करने में एक शानदार काम किया है।  बच्चन हमेशा की तरह अपना बेस्ट दे रहे हैं। निश्चित रूप से यह विज्ञापन किसी भी शख्स को जरा ठहरने और वॉटरप्रूफिंग पर अपनी सोच को लेकर फिर से विचार करने पर प्रेरित कर सकते हैं।
कैम्पेन में  बच्चन और जलीय जीवों के प्रतीकों वाली तीन विज्ञापन फिल्में हैं जो शॉर्टकट अपनाने पर ग्राहकों के सामने आने वाली शर्मिंदगी का अहसास करवाती है।
टीवीसी 1ः इस फिल्म में अमिताभ खुद अपनी भूमिका में है। फिल्म की शुरुआत में उन्हें एक कछुए के खोल के पास खड़ा दिखाया गया है। बच्चन कहते हैं, ’यहां हैं शर्माजी, ... शर्माजी बाहर आएं न, अपने ही लोग हैं।’ इसके बाद कछुए के खोल से शर्माजी का सिर बाहर निकलता दिखाई देता है। शर्माजी को देखते हुए श्री बच्चन बताते हैं कि अपने नए घर का निर्माण करते समय उन्होंने एक शॉर्टकट चुना और वॉटरप्रूफिंग के लिए दूसरों पर भरोसा किया। फिर वह कैमरे की ओर देखते हुए ग्राहकों से अपील करते हैं कि अपने नए घर का निर्माण करते समय डॉ. फिक्सिट टोटल वॉटरप्रूफिंग का उपयोग करें या फिर शर्माजी की तरह शर्मिंदगी का सामना करें।
टीवीसी 2ः यह विज्ञापन फिल्म मिस्टर मखीजा के सामने खड़े अमिताभ बच्चन से शुरू होती है। मिस्टर मखीजा, यानी एक मेंढक।  मखीजा से बात करते हुए, वे कहते हैं, ’मखीजा जी ने घर बनाते वक्त लापरवाही की, शॉर्टकट लिया और वॉटरप्रूफिंग नहीं की। अब अपने ही घर में फुदक-फुदक कर चलते हैं।’  बच्चन बताते हैं कि अगर आप घर बनाते समय डॉ. फिक्सिट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो आपको मिस्टर मखीजा जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और अपने मकान में मेंढक की तरह रहना होगा।
टीवीसी 3ः फिल्म की शुरुआत पानी से भरे एक घर में बैठे और कैमरे से बात करते हुए  बच्चन से शुरू होती है जब एक ऑक्टोपस का पंजा उनके हाथ को पकड़ कर चाय का कप छीन लेता है। फिर वे परिचय देते हैं, ’गुप्ताजी, एक ऑक्टोपस को आत्मसात कर चुके हैं और छत से पानी के रिसाव को रोकने के लिए कई घरेलू वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद श्री बच्चन एक नया घर बनाते समय वॉटरप्रूफिंग का महत्व बताते हैं; अन्यथा जीवन गुप्ताजी जी की तरह जटिल हो जाएगा।



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