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Wednesday, April 3, 2019

टोल प्लाजों पर फास्टैग प्रोग्राम से सुविधाजनक होगा टोल का भुगतान




 Extending FASTag program across State and City toll plazas will lead to convenience in toll payments for commuters

वर्तमान में, एनईटीसी प्रोग्राम के जरिए 496 राष्ट्रीय/राज्यीय टोल प्लाजों पर रोजाना 8.62 लाख ट्रांजेक्शन होते हैं

मुंबईः नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) प्रोग्राम ने काफी गति पकड़ ली है और अभी संग्रह किये जाने वाले कुल टोल का 25 प्रतिशत इस प्रोग्राम के जरिए संग्रह होता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने भारतीय बाजार की इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एनपीसीआई को इंटरऑपरेबल एवं स्केलेबल समाधान तैयार करने के लिए कहा था, और उसी के अनुसार, एनपीसीआई ने दिसंबर 2016 में एनईटीसी प्रोग्राम शुरू किया था।
एनईटीसी में सामान्य प्रक्रियाएं, व्यावसायिक नियम और तकनीकी विनिर्देश शामिल हैं, जो ग्राहकों को फास्टैग का उपयोग करने में सक्षम बनाते हैं। यह फास्टैग गाड़ी के विंडस्क्रीन पर चस्पा होता है, जिसके माध्यम से किसी भी टोल प्लाजा पर भुगतान किया जा सकता है, वो टोल प्लाजा चाहे जिसके अधीन हो। फास्टैग, आरएफआईडी पैसिव टैग होता है, जो ग्राहक को टोल प्लाजा पर भुगतान करने के लिए बिना रूके उससे होकर निकल जाने की अनुमति देता है। टोल चार्ज सीधे ग्राहक के लिंक्ड खाते से कट जाता है। फास्टैग प्रत्येक गाड़ी के लिए अलग-अलग होता है और एक गाड़ी पर चस्पा कर दिये जाने के बाद उसे वहां से निकालकर दूसरी गाड़ी पर चस्पा नहीं किया जा सकता है।
एक देश - एक टैग के विजन को प्रोत्साहन देने के लिए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने 28 मार्च, 2019 को एक कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य फास्टैग सेवाओं के बारे में चर्चा करना और इसे सभी राज्यीय एवं नगरीय टोल प्लाजा पर लागू करने हेतु पहल करना था। आईएचएमसीएल ने आकर्षक राज्यीय/शहरीय/एसपीवी ऑनबोर्डिंग पॉलिसी लाई है, जिसके द्वारा वे एनईटीसी प्रोग्राम के क्रियान्वयन हेतु राज्यीय/नगरीय/एसपीवी प्राधिकरण को वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे। इस कार्यशाला में इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई), कर्नाटक स्टेट हाइवेज इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (केएसएचआईपी), गुजरात स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, मध्य प्रदेश स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, तमिलनाडु रोड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों और एनईटीसी के सदस्य बैंकों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
एनईटीसी की हाल की प्रगतियों के बारे में, एनपीसीआई के मुख्य परिचालन अधिकारी, प्रवीणा राय ने कहा, ‘‘पिछले एक वर्ष में, एनईटीसी प्रोग्राम के प्रति भारी झुकाव देखा गया है। जनवरी 2017 में 30,000 के औसत दैनिक ट्रांजेक्शन की तुलना में, आज हम रोजाना 8.62 लाख ट्रांजेक्शन करते हैं। यदि राज्यों व नगरों के टोल प्लाजा टोल के भुगतानों के लिए फास्टैग को स्वीकार करना शुरू कर दें, तो इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है। आज, 22 जारीकर्ता बैंक सामूहिक रूप से 4.6 मिलियन फास्टैग्स जारी कर चुके हैं, जो देश के 496 से अधिक टोल प्लाजा पर स्वीकार्य है। आगे, पार्किंग, प्रवर्तन (ई-चालान) आदि जैसे उपयोग के अन्य मामले भी इसमें जोड़े जा सकते हैं और एनईटीसी प्रोग्राम किसी वाहन से जु़ड़े सभी भुगतानों के लिए सिंगल स्टॉप समाधान बन सकता है।’’
कार्यशाला के दौरान, एनएचएआई के सीजीएम-फाइनेंस, श्री राजेश शर्मा ने संपूर्ण डिजिटल इंडिया पहल में फास्टैग प्रोग्राम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘राज्यीय और नगरीय प्राधिकरणों द्वारा फास्टैग प्रोग्राम को अपनाये जाने से टोल ट्रांजेक्शंस में पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व की हेराफेरी कम होगी और इससे संपूर्ण रूप से कुशलता एवं वाण्ज्यििक क्षमता बढ़ेगी।’’
राज्यीय/नगरीय/एसपीवी टोल प्लाजों द्वारा एनईटीसी प्रोग्राम को अपनाये जाने से ट्रैफिक जाम होने जैसी स्थिति से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी और इससे कम्यूटर्स को बाधारहित अनुभव प्राप्त होगा। दिसंबर 2017 से सभी नये वाहनों पर फास्टैग लगाया जाना आवश्यक बनाने हेतु शासनादेश जैसे हाल के सरकारी कदमों ने इसके लिए व्यापक आधार तैयार किया है, जिसका राज्यीय और नगरीय प्राधिकरणों द्वारा आसानी से उपयोग किया जा सकता है।










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