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Friday, July 19, 2019

लीजिंग गतिविधि अब तक के सबसे उंचे स्तर पर- पहली छमाही 2019 में 30 मिलियन वर्ग फीट




नई दिल्ली। भारत की अग्रणी रियल एस्टेट कन्सल्टिंग फर्म सीबीआरई साउथ एशिया प्रा. लिमिटेड ने  अपने इण्डिया ऑफिस मार्केट व्यू 2019 के परिणामों का ऐलान किया है। सीबीआरई की रिपोर्ट के अनुसार पहली छमाही 2018 की तुलना में लीज़िंग गतिविधि 40 फीसदी बढ़कर 30 मिलियन वर्ग फीट के आंकड़े को पार कर गई है। 2019 के पहले अर्द्धवर्ष में; लीज़िंग गतिविधि 2018 के चरम आंकड़े को पार करते हुए ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई है। 
कुल मिलाकार में बैंगलोर, हैदराबाद, एनसीआर और मुंबई ने देश में लीज़िंग में तकरीबन 80 फीसदी का योगदान दिया। एसईज़ैड की हिस्सेदारी इसी अवधि में 26 फीसदी से बढ़कर 29 फीसदी हो गई- जिसमें बैंगलोर, हैदराबाद और पुणे का मुख्य योगदान रहा है।
ऑफिस लीज़िंग मार्केट पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए अंशुमन मैगज़ीन, चेयरमैन एवं सीईओ, साउथ ईस्ट एशिया, मिडल ईस्ट एवं अफ्रीका, सीबीआरई ने कहा, ‘‘रोचक तथ्य यह है कि बड़ी संख्या में विश्वस्तरीय एंव घरेलू फर्में अपने वैश्विक संचालन (ग्लोबल इन हाउस सेंटर-जीआईसी के माध्यम से) या टेक-उन्मुख सेवाओं के लिए भारत को कौशल के मुख्य गंतव्य के रूप में देखती हैं। परिणामस्वरूप हमारा अनुमान है कि समग्र ऑफिस स्पेस में टेक कोरपोरेट्स की हिस्सेदारी 2019 में सशक्त बनी रहेगी, जिसके रूझान अर्द्धवर्ष में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।’’
पहली छमाही 2019 के दौरान नए कार्यालयों की आपूर्ति में लगभग 29 मिलियन वर्गफीट की बढ़ोतरी हुई है; जिसमें हैदराबाद का योगदान सबसे ज़्यादा रहा, इसके बाद बैंगलोर, मुंबई और एनसीआर ने भी इसमें मुख्य योगदान दिया है।
पहली छमाही 2018 की तुलना में पहली छमाही 2019 के दौरान आपूर्ति 70 फीसदी बढ़ी जिसके चलते लगभग 28.9 मिलियन वर्गफीट विकास कार्य पूरा किया गया। चार शहरों- हैदराबाद, बैंगलोर, चेन्नई और एनसीआर ने इस आपूर्ति में 80 फीसदी से अधिक योगदान दिया। 2018 के पहले अर्द्धवर्ष की तुलना भ्1 2019 में के दौरान आपूर्ति में एसईज़ैड का योगदान 32 फीसदी से कम होकर 24 फीसदी हो गया। भ्1 2019  के दौरान एसईज़ैड विकास मुख्य रूप से हैदराबाद और नोएडा में हुआ, इसके बाद पुणे और मुंबई में हुआ।
राम चंदनानी, मैनेजिंग डायरेक्टर, अडवाइज़री एण्ड ट्रांज़ैक्शन सर्विसेज़, इण्डिया- सीबीआरई साउथ एशिया प्रा लिमिटेड ने कहा, ‘‘ फ2 2019 के दौरान लीज़िंग गतिविधि में लगभग आधा योगदान टेक कोरपोरेट्स द्वारा ऑफिस स्पेस के रूप में दिया गया। इसके बाद बीएफएसआई फर्मों का योगदान 11 फीसदी रहा, वहीं फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटरों का योगदान 10 फीसदी रहा। देश के लगभग हर बड़े शहर में टेक फर्में तेज़ी से विस्तारित हो रही हैं। परिणामस्वरूप लीज़िंग में सेक्टर का योगदान जो फ1 2019 में 32 फीसदी था वह फ2 2019 के दौरान बढ़कर लगभग आधा हो गया है। ऑफिस स्पेस लीजिंग को बढ़ावा देने वाले अन्य क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, इंजीनियरिंग और मैनुफैक्चरिंग शामिल हैं।’’
इस तिमाही में छोटे से मध्यम आकार के लेनदेनों का प्रभुत्व रहा
पिछली तिमाहियों की तरह इस तिमाही में छोटे से मध्यम आकर के लेनदेनों का प्रभुत्व रहा। छोटे आकार के लेनदेनों  ने लेनदेन गतिविधि में लगभग 31 फीसदी का योगदान दिया, वहीं मध्यम आकार (10,000 वर्गफीट से 50,000 वर्गफीट के बीच) के लेनदेनों का योगदान 47 फीसदी रहा। बड़े आकार के लेनदेन भी इस तिमाही के दौरान 11 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गए हैं। बड़े आकार की डील्स में सबसे ज़्यादा योगदान बैंगलोर का और उसके बाद हैदराबाद का रहा, हैदराबाद, एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, पुणे और अहमदाबाद में भी कुछ बड़ी डील्स हुई हैं।
प्री-लीजिं़ग गतिविधि में बढ़ोतरी
विभिन्न शहरों में उपभोक्ता पहले से लीज़िंग (प्री-लीज़िंग) कर भविष्य में होने वाली किराए की बढ़ोतरी के प्रभावों से अपने आप को सुरक्षित रखना चाहते हैं। दूसरी तिमाही में प्री-लीज़िंग लगभग दोगुनी होकर 6 मिलियन वर्गफीट के आंकड़े को पार कर गई, इसमें सबसे ज़्यादा योगदान बैंगलोर का रहा, इसके बाद हैदराबाद, गुड़गांव, चेन्नई और पुणे का योगदान प्रमुख रहा। टेक फर्मों और फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटर्स ने खासतौर पर तिमाही के दौरान प्री-लीज़िंग पर ज़ोर दिया है।
इसके अलावा प्री-लीज़िंग गतिविधि पहली छमाही 2018 के दौरान 6 मिलियन वर्गफीट से अधिक थी, जो पहली छमाही 2019 के दौरान बढ़कर 9 मिलियन वर्गफीट के आंकड़े को पार कर गई। टेक फर्मों और फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटर्स ने खासतौर पर प्री-लीज़िंग पर ज़ोर दिया। इसके अलावा बीएफएसआई, ऑटोमोबाइल, रीसर्च, कन्सल्टिंग और एनालिटिक्स एवं इंजीनियरिंग और मैनुफैक्चरिंग फर्मों ने भी प्री-लीज़िंग पर ज़ोर दिया है।

ऑफिस की मांग बढ़ने तथा रेंटल क्षेत्र में निरंतरता बने रहने के कारण निवेशकों का रूझान जारी है
इस साल ऑफिस स्पेस मार्केट फिर से सशक्त बना हुआ है, ऐसे में अगली तिमाही में ज़्यादातर लघु बाज़ारों में रेंटल क्षेत्र में विकास की संभावना है। इससे संस्थागत निवेशक और डेवलपर्स दोनों आकर्षित होंगे, क्योंकि पहली छमाही  2019 के दौरान सेक्टर में निर्मित सम्पत्तियों और ज़मीन पर 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी लगाई गई।
 
 

  दूसरी तिमाही 2019 के लिए शहरों के आधार पर मुख्य बिन्दु
एनसीआर
स्पेस में त्रैमासिक वृद्धि
गुड़गांव लीज़िंग गतिविधि में सबसे आगे
गुड़गांव और नोएडा के कई लघु-बाज़ारों में किराया बढ़ा

बैंगलोर
बैंगलोर में मांग देश में सबसे ज़्यादा बढ़ी
सभी लघु बाज़ारों में आपूर्ति में बढ़ोतरी
सीबीडी, एसबीडी, ओआरआर और पीबीडी में त्रैमासिक आधार पर रेंटल मूल्य में मामूली बढ़ोतरी

मुंबई
लीजिंग गतिविधि में त्रैमासिक रूप से मामूली कमी आई।
नवी मुंबई, थाणे और वेस्टर्न सबअर्ब 2 में आपूर्ति में बढ़ोतरी।
बीकेसी, नवी मुंबई, ईस्टर्न सबअर्ब और वेस्टर्न सबअर्ब 1 एवं 2 में रेंटल मूल्य में बढ़ोतरी।

हैदराबाद
त्रैमासिक आधार पर बड़े पैमाने पर स्थायी लीज़िंग गतिविधि
आईटी कॉरीडोर 2 में आपूर्ति में बढ़ोतरी
सीबीडी, आईटी कॉरीडोर 1 एवं 2 अैर विस्तारित आईटी कॉरीडोर में रेंटल मूल्य में बढ़ोतरी



चेन्नई
त्रैमासिक अवशोषण सालाना आधार पर बढ़ा
सीबीडी और ऑफ सीबीडी में आपूर्ति में बढ़ोतरी
त्रैमासिक आधार पर ओएमआर ज़ोन 1 और माउंट पूनम माली रोड पर रेंटल में बढ़ोतरी

पुणे
त्रैमासिक आधार पर लीज़िंग गतिविधि में बढ़ोतरी
एसबीडी ईस्ट और एसबीडी खरादी में आपूर्ति में बढ़ोतरी
लगभग सभी लघु बाज़ारों में रेंटल मूल्य में त्रैमासिक बढ़ोतरी

कोलकाता
त्रैमासिक आधार पर लीज़िंग गतिविधि में गिरावट दर्ज की गई।
आपूर्ति में न के बराबर बढ़ोतरी, रेंटल मूल्य में स्थिरता बनी रही।

कोची
लीज़िंग गतिविधि एसबीडी में सांद्रित रही
रेंटल मूल्यों में स्थिरता

अहमदाबाद
स्पेस में त्रैमासिक कमी
एसबीडी में आपूर्ति में बढ़ोतरी
रेंटल मूल्य में स्थिरता

दृष्टिकोण
2019 में टेक्नोलॉजी केे डिसरप्टिव बदलाव का प्रभाव स्प्ष्ट रूप से दिखाई देगा, हितधारक इनसे निपटने के लिए विभिन्न कदम उठा रहे हैं, वे ‘प्रयोग’ के बजाए ‘बदलाव’ की ओर रुख कर रहे हैं। छोटी अवधि में ऑफिस लीज़िंग गतिविधि के बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कोरपोरेट्स अपने संचालन का विस्तार कर रहे हैं। भारत अमेरिका के अलावा ईएमईए और एपीएसी क्षेत्र के कोरपोरेट्स को भी आकर्षित कर रहा है।

इसके अलावा, बीएफएसआई, इंजीनियरिंग एवं मैनुफैक्चरिंग, अनुसंधान एवं कन्सल्टिंग और फ्लेक्सिबल स्पेस कोरपोरेट्स सालाना लीज़िंग गतिविधि में बड़ा योगदान देंगे। फार्मास्युटिकल्स, टेलीकॉम और ई-कॉमर्स की ओर से भी कॉमर्शियल स्पेस की मांग बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2019 में लीज़िंग गतिविध में बढ़ोतरी को देखते हुए 2019 के अंत तक लीजिंग गतिविधि 2018 की तुलना में 5-10 फीसदी सालाना तक बढ़ जाएगी।
 

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