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Thursday, August 1, 2019

इलेक्ट्रिक जगुआर आई-पेस का मालिक होना और इसे चलाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान





जयपुर,
उपयोग और खर्च पर फोकस करने वाले तीन खास फीचर्स की बदौलत अब ऑल-इलेक्ट्रिक जगुआर आई-पेस रखना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। ये तीन फीचर हैं : नया ऑनलाइन रेंज कैलकुलेटर, सरल-टैरिफ वाली पब्लिक चार्जिंग सर्विसऔर गो आई-पेस ऐप।

नया ऑनलाइन रेंज कैलकुलेटर उपयोगकर्ताओं को इस बारे में बढ़िया समझ देता है कि पहिए का आकार, तापमान जैसे कारक और अन्य सुविधाएं वाहन की अधिकतम रेंज 470 किमी (292 मील) (डब्ल्यूएलटीपी) पर किस तरह के असर डालती हैं।

जगुआर की नई सिम्‍पल टैरिफ पब्लिक चार्जिंग सर्विस वाहन मालिकों को यूरोप भर में 1,10,000  से ज्यादा सार्वजनिक प्लग-इन पॉइंट्स तक पहुंच प्रदान करती है, जिसके लिए पीएवाजी मॉडल का उपयोग करते हुए उन्हें महीने भर में बस एक बिल भरना होता है या फिर इसके लिए तयशुदा सदस्यता शुल्क होता है।

आइफोन या एंड्रॉयड के लिए गो आई-पेस ऐप किसी भी कार में दैनिक उपयोग को मापते हुए संभावित खरीदारों को यह समझने में मदद करता है कि आई-पेस किस कदर उनकी जिंदगी के लिए उपयुक्त होगा। यह ऐप खर्च में संभावित बचत, प्रति ट्रिप कितनी बैटरी का उपयोग होगा और कुल दूरी को कवर करने के लिए कितने बार चार्ज की आवश्यकता होगी, ये सारी गणनाएं करता है। इ सभी के लिए वह स्मार्टफोन की लोकेशन सर्विसेज के जरिए व्यक्तिगत उपयोगकर्ता के सफर से जुड़े आंकड़ों को ट्रैक करता है।

जगुआर लैंड रोवर में ई-मोबिलिटी के प्रमुख रॉब मैक्की ने कहा: “इन डिजिटल टूल्स का उपयोग करके मौजूदा और संभावित ग्राहक बड़ी सटीकता के साथ देख सकते हैं कि एक आई-पेस उनकी जिंदगी में किस कदर फिट हो सकती है। वाहन की रेंज कैसे विभिन्न फीचर्स से प्रभावित होती है, वे इस बारे में भी वास्तविक अंतर्दृष्टि पाते हैं। इन सुविधाओं के साथ पूरे यूरोप में सरल टैरिफ वाली चार्ज सर्विस को भी जोड़ लें, तो फिर जगुआर आई-पेस रखना और चलाना इतना आसान और सहज कभी नहीं रहा है, जैसा अब हो गया है।”

जगुआर के गो आई-पेस ऐप द्वारा कैप्चर किए गए डेटा से पता चला है कि यूरोप भर में 85 प्रतिशत मालिकों को अपने सप्ताह भर के सफर के लिए वाहन को अधिकतम दो बार ही फुल चार्ज करने की जरूरत पड़ती है, जबकि 54 प्रतिशत को तो सात दिनों में केवल एक बार चार्ज करने की दरकार होती है।

इंटेलीजेंट स्मार्टफोन ऐप ने जिन 35,000 से ज्यादा यात्राओं का हिसाब-किताब रखा है, उनसे पता चलता है कि एक औसत उपयोगकर्ता प्रति सप्ताह 347 किमी (216 मील) तक गाड़ी चलाता है, जिसमें एक औसत यात्रा 13 किमी (8.4 मील) की होती है। इसके अलावा, घर में स्थापित जगुआर द्वारा अनुमोदित एसी वॉल बॉक्स (7 किलोवाट) के जरिए वाहन चालक केवल 10 घंटे में शून्य से 80 प्रतिशत चार्ज कर सकते हैं - अधिकांश ईवी ड्राइवर रात में चार्जिंग करते हैं, उनके लिए यह आदर्श है।

प्लग-इन किए जाने पर आई-पेस के मालिक यह भी चुन सकते हैं कि उनका वाहन किस समय चार्जिंग शुरू करेगा, ताकि सस्ती बिजली दरों का लाभ उठाया जा सके।
जोआना हेविट, डिजिटल इनोवेशंस, जगुआर लैंड रोवर का कहना है: "गो आई-पेस ऐप को यह जाहिर करने के लिए डिजाइन किया गया है कि ईवी स्वामित्व वाहन चालकों को किस तरह लाभ पहुंचा सकता है, खासतौर पर ये ऐप यह समझने में मदद करता है कि गाड़ी की रेंज पर यात्रा कैसे असर डालती है और उन्हें कितनी बार प्लग इन करने की आवश्यकता होगी। डेटा पर नजर डालते हुए यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि आई-पेस का स्वामित्व न केवल किफायती है, बल्कि यह बहुत सुविधाजनक भी है।”

आई-पेस में स्मार्ट रेंज-ऑप्टिमाइजिंग तकनीकों का एक समूह भी है। इसमें बैटरी प्री-कंडीशनिंग सिस्टम भी शामिल है, जो प्लग-इन होने पर ड्राइविंग से पहले ही बैटरी के तापमान को स्वचालित रूप से बढ़ा या कम कर देता है, ताकि अधिकतम रेंज मिल सके।

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