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Thursday, September 19, 2019

टोयोटा ने ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ की शुरुआत की







बैंगलोर, सितंबर 2019 : भारत में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) की दो दशक की शानदार यात्रा पर खुशी मनाते हुए भारत में ‘द 5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ की शुरुआत हुई। आज और कल के लिए - मिलकर बेहतर कारें बनाने के वादे के साथ यह शुरुआत हुई है। ‘द 5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ एक ‘गेनची गेनबुत्सु’ परियोजना है। इसमें कर्मचारी तथ्यों की जानकारी के लिए स्रोत के पास जाते हैं। यहां इसे टोयोटा गेजू रेसिंग के तहत किया जा रहा है। 

ऑस्ट्रेलिया में इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी और अभी तक ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट ने दुनिया भर के चार महादेशों को कवर कर लिया है और अंतिम चरण में इस साल के शुरू में एशिया पहुंचा है। इस परियोजना के भाग के रूप में टोयोटा के कर्मचारी पांच महादेशों में भिन्न स्थितियों में गाड़ियां चला चुके हैं। ये हैं – ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका (उत्तरी और लैटिन), यूरोप, अफ्रीका और एशिया जहां 2020 के टोक्यों ओलंपिक तथा गेम्स के दौरान होगा तथा यह ओलंपिक प्रतीक के पांच रिन्ग का प्रतिनिधित्व करेगा। 

‘द 5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ को झंडा दिखाकर रवाना करने का समारोह टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कर्नाटक स्थित बिडाडी प्लांट में हुआ। 

बैंगलोर से टीएमसी और टीकेएम कर्मचारियों का काफिला अपने साझेदारों के साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान राज्य होकर और अपने गंतव्य नई दिल्ली पहुंचेगा। यहां यह ड्राइव सितंबर के आखिरी दिनों में पूरा हो जाएगा। वाहनों के इस काफिले में टोयोटा की गाड़ियां रहेंगी जो भारत में उसकी मौजूदा मोटर से ली जाएगी। 

भारत में इस परियोजना की शुरुआत के मौके पर अपने विचार रखते हुए, गेजू रेसिंग कंपनी, टीएमसी के महाप्रबंधक  योइची मिनामियामा ने कहा, “टोयोटा गेजू रेसिंग का दृढ़ विश्वास है कि ‘सड़क पर हम जानते हैं कि और बेहतर कारें कैसे बनाएं’। ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट की तैयारी इसी सोच को टेस्ट करने के लिए की गई है। ‘गेनची गेनबुत्सु’ के दर्शन से संचालित यह परियोजना हमें सड़क की मुश्किल स्थितियों में गाड़ी चलाने का मौका देती है। इससे हम दुनिया भर की सड़कों के बारे में अनुभव और ज्ञान हासिल कर पाते हैं, ग्राहकों की प्रतिक्रिया जान पाते हैं, दुनिया भर की संस्कृतियों को आमने-सामने देखते हैं और मिलकर ढेरों समस्याओं तथा चुनौतियों का समाधान तलाशते हैं। इस तरह के अनुभव हमें और बेहतर कार बनाने के लिए आवश्यक हमारी सहज अनुभूति को और निखारने का मौका देते हैं और यह एक ऐसे ढंग से होता है जिसे डेस्क पर या टेस्ट के दौरान हासिल नहीं किया जा सकता है। इस तरह यह मानव संसाधन के विकास में योगदान करता है।    

उन्होंने आगे कहा, 2014 में ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद से करीब 520 भागीदारों ने भिन्न महादेशों की यात्रा की है ताकि हरेक क्षेत्र में सड़कों की सीख को अपने-अपने कार्यस्थल पर ले जा सकें। इस तरह कॉरपोरेट की दीवार गिराकर सड़क पर सीखने का काम होता है। भारत में अपनी यात्रा की शुरुआत के साथ हम भारतीय सड़कों की खासियतों और चुनौतियों को समझना चाहते हैं।” 

इस मौके पर अपने विचार रखते हुए टोयोटा मोटर एशिया पैसेफिक (टीएमएपी) के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अत्सुहिरो ओकामोतो ने कहा, “टोयोटा के लिए भारतीय बाजार बहुत महत्वपूर्ण है और इसी मकसद से हमलोगों ने ‘5 कांटिनेंट्स एशिया ड्राइव’ के दूसरे चरण को भारत में शुरू करना चाहा है। टोयोटा ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट में एशिया अंतिम चरण है। फरवरी 2019 में टीम ने शुरुआत की जगह – मध्य पूर्व से काम शुरू किया था और उसे आगे बढ़ाते हुए भिन्न टीमें पूरे एशिया में गाड़ी चलाएंगी और म्यामार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, फिलीपीन्स आदि को कवर करते हुए नवंबर 2019 में वियतनाम में यह यात्रा खत्म हो जाएगी।     

अंत में उन्होंने कहा भारत की हमारी यात्रा इस मायने में और खास है कि वास्तविक भारत को जानने की हमारी कोशिश में टोयोटा कर्मचारियों के साथ सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन / एमएसआईएल के सदस्य भी इसमें भाग लेंगे। इसके अलावा, टोयोटा ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ की अहमियत मालूम हो रही है और टोयोटा की ग्लोबल कॉरपोरेट पहल, ‘स्टार्ट योर इमपॉसिबल’ को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसका मकसद हमारे कर्मचारी समेत लोगों को प्रेरित करना है तथा इनमें चुनौतियों और असंभव के खिलाफ स्टैंड है। भारत में हम लाभप्रद ड्राइव की उम्मीद करते हैं और टीम के लिए उनकी इस यात्रा में सर्वश्रेष्ठ की कामना करते हैं।” 

‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट टीम का भारत में स्वागत करते हुए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) के प्रबंध निदेशक  मसाकाजू योशिमुरा ने कहा, “भारत में दो दशक की अपनी पूरी यात्रा के दौरान हमारी हमेशा यह कोशिश रही है कि अपने कारोबार, कर्मचारियों और हमारे साझेदारों के लिए स्थायी विकास हासिल हो। हमलोगों ने हमेशा खुद को चुनौती दी है ताकि अपने ग्राहकों से जुड़ने और सेवा करने के नए तरीके तैयार कर सकें। हमारा मानना है कि यह परियोजना हमारे मानव संसाधन के संपूर्ण विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उन्हें ग्राहकों की सेवा बेहतर ढंग से करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल मुहैया होगा। 

सड़क लोगों को प्रशिक्षण देती है और लोग कारें बनाते हैं’ के दर्शन के साथ, ‘द 5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ का काफिला भारत के विविधतापूर्ण लोकेशन से गुजरेगा और इस दौरान ग्राहकों की प्रतिक्रिया लेगा, सड़कों की प्रकृति को समझेगा, वाहनों के अपने स्तर की समीक्षा करेगा, विश्वसनीयता, मजबूती और आराम के मूल्य को जानेगा, ‘गेनची गेनबुत्सु’के जरिए ज्ञान हासिल करेगा और इस तरह भारत में और भी बेहतर कारें बनाना जारी रखेगा।” 

इस परियोजना के बारे में अपने विचार और भारत में टोयोटा के लिए इसका क्या मतलब है इस बारे में बताते हुए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) के उप प्रबंध निदेशक एन राजा ने कहा, “टोयोटा किर्लोस्कर मोटर हमेशा मूल्य बढ़ाने और ग्राहक अनुभव अपने जाने-माने क्यूडीआर (क्वालिटी, ड्यूरेबिलिटी तथा विश्वसनीयता) दर्शन के जरिए को बेहतर करने की कोशिश में रहता है। यह परियोजना और भी बेहतर कार मुहैया कराने तथा ग्राहकों की हमेंशा सामने आने वाली आवश्यकताओं को पूरा करने के हमारे लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक कदम और करीब है। इस परियोजना से हासिल ज्ञान से हमें अपनी मौजूदा पेशकशों को मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार समाधानों की हमारी पेशकश को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। हमें खुशी है कि हम ‘5 कांटिनेंट्स ड्राइव’ प्रोजेक्ट भारत में स्वागत कर रहे हैं क्योंकि यह परियोजना न सिर्फ टोयोटा के इंजीनियर के लिए हमारे देश को समझना संभव बनाएगी बल्कि भारत में वितरकों और ग्राहकों को भी यह मौका मिलेगा कि उनसे चर्चा कर सकें। इस मौके के लिए हम टीम को धन्यवाद देंगे और ड्राइव के लिए सर्वश्रेष्ठ की कामना करते हैं।” 

इस परियोजना में टोयोटा का लक्ष्य ना सिर्फ कार चलाने वाले कर्मचारियों को विकसित करना है बल्कि अपने साझेदारों और अन्य आंतरिक और वाह्य स्टेकधारकों को भी प्रेरित करना। वाहन चलाने वाले हासिल ज्ञान को एशिया चरण खत्म होने के बाद आंतरिक रिपोर्ट के जरिए दूसरे कर्मचारियों से साझा करेंगे। 

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