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Friday, October 18, 2019

राजस्थान में अविकसित 39.1ः बच्चे, देश के निचले पांच राज्यों में शामिल

IIHMR and Gain Food Fortification "With 39.1% of children stunted, Rajasthan continues to be one of the bottom five states of the country"


जयपुर। देश में बच्चों की अविकसित दर 37.9ः है, जिसे इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व के संदर्भ में बहुत उच्च श्रेणी में रखा गया है। राजस्थान में 39.1ः बच्चे (5 वर्ष से कम) हैं, जिसमें अविकसित बच्चों कि समस्या का समाधान करना बहुत ही आवश्यक है। भारत विश्व शक्ति, और आर्थिक विकास में अग्रसर है, लेकिन स्वास्थ्य और पोषण के ये आंकड़े बहुत निराशाजनक तस्वीर देते हैं। भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 21ः बच्चे कुपाषण का शिकार हो गए हैं और तथ्य से पता चलता है कि भारत में कुपोषण की समस्या का हल करना जरूरी है। हमें छोटे छोटे कदम उठाने चाहिए जिससे हमें भविष्य में विकास की दिशा मिल सके। यह बात राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कही, जो आज जयपुर में आयोजित राजस्थान फूड फोर्टिफिकेशन समिट 2019 के मुख्य अतिथि थे। सम्मेलन का आयोजन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च ( आई आई एच एम आर ) ने ग्लोबल एलायंस फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन (गेन) के साथ मिलकर किया है।
प्रो-प्रेसिडेंट और डीन ट्रेनिंग, आई आई एच एम आर, डॉ. पी. आर. सोढानी ने कहा, “राजस्थान एक ऐसा मॉडल राज्य है, जहां खाद्य तेल और डेयरी उद्योग ने देश में अपना शानदार विकास रिकॉर्ड बनाया है। यह राजस्थान में फूड फोर्टिफिकेशन पर पहला और सबसे बड़ा कार्यक्रम है और इसे सफल बनाने के लिए राजस्थान सरकार और अन्य भागीदारों को इस मंच पर एक साथ आने के लिए बधाई देते है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 6 करोड़ लोग राजस्थान में फोर्टिफाइड तेल और 100 से अधिक उद्योगों का उत्पादन कर रहे हैं जो एक बहुत ही अनुकूल आंकड़ा है।
राजस्थान सरकार के सचिव, कौशल, रोजगार और उद्यमिता और श्रम विभाग के, नवीन जैन ने कहा कि हमें तेजी से कदम उठाने कि जरूरत है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी खाघ्य उघमियों को मिल कर इसे लागू करना चाहिए। पोषण एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन फिर भी इसे हमेशा पीछे छोड़ दिया जाता है।
आईआईएचएमआर के अध्यक्ष, डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि कुपोषण एक गंभीर मुद्दा है जिसने राष्ट्र की प्रगति को प्रभावित किया है। यहाँ, माइक्रोन्यूट्रिएंट कुपोषण सभी आयु और सामाजिक-आर्थिक समूहों में प्रचलित है, जिससे यह एक बड़ा मुद्दा है ओैर भारत को इस मुधे से निपटना चाहिए। आज बच्चे के अविकसित की दर 37.9ः है जबकि बच्चे के कुपोषण के शिकार होने की दर 28.8 है। इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए खाद्य फोर्टिफिकेशन एक व्यवहार्य समाधान है।
हेड प्रोग्राम्स, ग्लोबल एलायंस फॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन (गेन),  दीप्ति गुलाटी ने फूड फोर्टिफिकेशन की प्रासंगिकता की जानकारी दी। फोर्टीफीकेशन हमें पोषण देता है, हमें विटामिन ए देता है और हमारे भोजन को समृद्ध करता है। पोषण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विकास और विकास के लिए स्वास्थ्य और केंद्रीय को परिभाषित करता है। उन्होंने फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियामक निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया और विटामिन ए और डी के साथ तेल और दूध को मजबूत करना अनिवार्य कर दिया।
देश के निदेशक, गेन तरुण विज ने एक संक्षिप्त विवरण दिया और यह राजस्थान में लोगों तक कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि गेन द्वारा उत्पादित उत्पाद 650 मिलियन भारतीय नागरिकों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि गेन राज्य स्तर पर गहरी पैठ के लिए सरकारी क्षेत्रों के साथ गठबंधनों और कार्यों में भागीदारी और नेतृत्व की सुविधा प्रदान करता है।
भारतीय स्वास्थ्य प्रबंधन अनुसंधान संस्थान ( आईआईएचएमआर ), जयपुर ने गेन से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ फरवरी 2011 से राजस्थान में एकीकृत कार्यक्रम रणनीति नामक एक खाद्य दुर्ग परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया है। विश्वविद्यालय राजस्थान, हरियाणा, और पंजाब में खाद्य तेल फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा देने और सुदृढ़ीकरण नामक परियोजना को लागू करने के लिए एक कार्यकारी एजेंसी रही है।

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