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Wednesday, October 30, 2019

भारतीय उपभोक्ता ऋण बाजार में जारी है मंदी का दौर


TransUnion CIBIL_Industry Insights CY Q2 2019 Press Release October 30, 2019


मुंबई। मुख्य तौर पर सिक्योर्ड लेंडिंग प्रोडक्ट्स द्वारा संचालित भारत के उपभोक्ता ऋण बाजार में लगातार दूसरी तिमाही में गिरावट जारी रही। साथ ही, उच्च जोखिम वाले अनसिक्योर्ड क्रेडिट की ओर पोर्टफोलियो बदलाव के कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी दबाव में बनी रहीं। चालू वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही के बारे में ट्रांसयूनियन सिबिल की नवीनतम इंडस्ट्री इनसाइट्स रिपोर्ट (आईआईआर) में इन तथ्यों का खुलासा किया गया है।
एनबीएफसी, जिहोंने हाल के वर्षों में उपभोक्ता ऋण वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्होंने बैंकों की तुलना में दूसरी तिमाही में धीमी वृद्धि देखी है। एनबीएफसी ने निरंतर कठिन फंडिंग चुनौतियों का सामना किया और इसके परिणामस्वरूप उन्होंने अपनी रणनीति को बदलते हुए बड़े मूल्य वाले ऋणों की बजाय छोटे, व्यक्तिगत ऋणों की तरफ रुख किया।
2019 की दूसरी तिमाही में सभी प्रमुख ऋण उत्पादों में उपभोक्ता ऋण बेलेंस 17.1 फीसदी वर्ष-दर-वर्ष बढ़ा, 2018 की दृसरी तिमाही में 23.5 फीसदी वर्ष-दर-वर्ष की तुलना में। क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन में तेजी आई, ऑटो लोन, होम लोन और लोन अंगेनस्ट प्रॉपर्टी (एलएपी) में वृद्धि हुई। 2019 की दूसरी तिमाही में क्रेडिट की पहुंच वाले उपभोक्ताओं की कुल संख्या में 21.7 फीसदी की वृद्धि हुई, जो कि दुनिया भर की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी काफी अधिक है, पर 2018 में  26.3 फीसदी की छलांग की तुलना में यह काफी कम है।
2019 की दूसरी तिमाही में अधिकांश उपभोक्ता ऋण उत्पादों के मामले में चूक की दर में गिरावट रही, हालांकि लोन अंगेस्ट प्रॉपर्टी (एलएपी) एक अपवाद रहा। हालांकि उच्च वृद्धि दर के कारण पोर्टफोलियो-स्तर पर चूक हो सकती है, इसलिए इस चिंता का समाधान करने के लिए, ट्रांसयूनियन ने विभिन्न खातों में चूक संबंधी गतिविधियों का अध्ययन किया। इस स्टेटिक पूल विश्लेषण-जिसे विंटेज विश्लेषण के रूप में भी जाना जाता है - ने चूक की दर में सालाना आधार पर सामान्य सुधार की पुष्टि की, लेकिन एनबीएफसी द्वारा जारी किए गए कम मूल्य के व्यक्तिगत ऋण और ऑटो ऋण के प्रदर्शन में गिरावट को प्रकट किया।

ट्रांसयूनियन सिबिल के वाइस प्रेसीडेंट-रिसर्च और कंसल्टिंग अभय केलकर कहते हैं, ‘‘एनबीएफसी का नगदी संकट एक गंभीर चिंता बनता जा रहा है, क्योंकि इसका व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। भले ही कुल उपभोक्ता ऋण में कमी इस मंदी के माध्यम से काफी हद तक स्थिर रही है, हमारे डेटा संकेत दे रहे हैं कि एनबीएफसी में कुछ तनाव बन रहे हैं। मजबूत ऋणदाता जोखिम प्रबंधन नीतियां उधार बाजार के स्वास्थ्य के लिए हमेशा महत्वपूर्ण होती हैं। हम एक ऐसे माहौल में ही खुद को तेजी से बढ़ाते हैं, जहां कमजोर पोर्टफोलियो के प्रभाव को कम करने के लिए चौकस निगरानी और विचारशील रणनीतियां आवश्यक हैं।”
क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की अनसिक्योर्ड ऋण देने वाली श्रेणियों में मजबूत संतुलन और उत्पत्ति की वृद्धि 2019 की दूसरी तिमाही में जारी रही।
क्रेडिट कार्ड का उत्पत्ति वॉल्यूम 2019 की दूसरी तिमाही में 30.2 फीसदी की स्वस्थ वृद्धि के कारण 2019 की दूसरी तिमाही में क्रेडिट कार्ड खातों की कुल संख्या में 29.5 फीसदी की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हुई। इसी अवधि में, कुल क्रेडिट कार्ड की शेष राशि 34.34 फीसदी बढ़ गई।
2019 की दूसरी तिमाही के दौरान, क्रेडिट कार्ड की उत्पत्ति का झुकाव उच्च जोखिम वाले स्तरों की तरफ था। 2019 की दूसरी तिमाही में, 32.1 फीसदी कार्ड की उत्पत्ति बिलो-प्राइम रिस्क टियर (सबप्राइम और प्राइम) के उपभोक्ताओं के लिए थी, जबकि 2018 की दूसरी तिमाही में यह 26.4 फीसदी था।
बिलो-प्राइम कंज्यूमर, जो उच्च-जोखिम वाले उधारकर्ता हैं, का ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल क्रेडिट स्कोर 700 या उससे कम है। फुल बैंडिंग को इस प्रकार परिभाषित किया गया हैः सबप्राइम = 300-650, प्राइम = 651-700 के पास, प्राइम = 701-750, प्राइम प्लस = 751-800, और सुपर प्राइम = 801-900। उच्च स्कोर कम जोखिम का संकेत हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में उच्च-जोखिम वाले उधारकर्ताओं के लिए उत्पत्ति में बदलाव के बावजूद, क्रेडिट कार्ड डिलिंगक्वंसी 27 बीपीएस वर्ष-दर-वर्ष सुधरी। पिछली पांच तिमाहियों में बैलेंस-स्तर की देरी 1.85-1.90 फीसदी के बीच रही है। विंटेज विश्लेषण इस सुधार की पुष्टि करता है कि पोर्टफोलियो स्तर पर सभी रिस्क टियर और डिलिंगक्वंसी में अलग-अलग मूल समूहों में किसी भी छिपे हुए प्रदर्शन में गिरावट नहीं थी।
2019 की दूसरी तिमाही में पर्सनल लोन बैलेंस में 35.0 फीसदी की वृद्धि हुई, उत्पत्ति की मात्रा में तेजी 2019 की दूसरी तिमाही में 139.4 फीसदी वर्ष-दर-वर्ष हुई। एनबीएफसी इस श्रेणी में विकास की प्राथमिक चालक बनी रही। एनबीएफसी पर्सनल लोन बैलेंस में 2019 की दूसरी तिमाही में 51.4 फीसदी वर्ष-दर-वर्ष की वृद्धि हुई और एनबीएफसी का कुल उत्पत्ति संस्करणों का प्रतिशत 2018 के दूसरी तिमाही के 48.4 फीसदी से बढक़र 72.1 फीसदी हो गया। एनबीएफसी के पर्सनल लोन का एवरेज टिकट साइज (एटीएस) 2018 की दूसरी तिमाही के 1.1 लाख रुपए से गिर कर 2019 की दूसरी तिमाही के 41 हजार रह गया, यह एटीएस में एक तेज गिरावट थी। 2019 की दूसरी तिमाही में लगभग 50 फीसदी उत्पत्ति बिलो-प्राइम सेगमेंट में उधारकर्ताओं के लिए हुई थी, जो कि 2018 की दूसरी तिमाही में 8.5 फीसदी की वृद्धि का प्रतिनिधित्व कर रही थी।
सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) और निजी क्षेत्र (पीवीटी) में सुधार के कारण बैंक पर्सनल लोन डिलिंगक्वंसी दूसरी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 6 बीपीएस की वृद्धि की भरपाई से अधिक हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप ओवरऑल लोअर डिलिंगक्वंसी रेट ने भी सुधार दिखाया है। विंटेज एनालिसिस पीएसयू (-12 बीपीएस) और पीवीटी (-22 बीपीएस) में एनबीएफसी कॉहोर्ट प्रदर्शन (़51 बीपीएस) में सुधार दर्शाता है। ऋण आकार के अनुसार एनबीएफसी विंटेज डिलिंगक्वंसी को लांघते हुए, ट्रांसयूनियन सिबिल के विश्लेषण में 50 हजार रुपए (़191 बीपीएस) की तुलना में छोटे ऋणों की संख्या में वृद्धि हुई, जो एनबीएफसी व्यक्तिगत ऋण उत्पत्ति का 80 प्रतिशत हिस्सा है।
 केलकर ने कहा, ‘‘क्रेडिट-कार्ड और पर्सनल-लोन बैलेंस में बिलो-प्राइम और मिड-रिस्क टियर में कुल मिलाकर मार्केट के मुकाबले ग्रोथ रेट ज्यादा था। यह उधारदाताओं के बीच एक बड़ी इच्छा को रेखांकित करता है कि वे अपने अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को शिथिल करें और उच्च-जोखिम वाले उधारकर्ताओं को अधिक असुरक्षित ऋण का विस्तार करें। इस तरह के दृष्टिकोण निश्चित रूप से विकास की गति तेज हो सकती है, जैसा कि हमने देखा है, लेकिन इसके लिए निरंतर और प्रभावी जोखिम प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता होती है, ताकि निरंतर आधार पर ठीक से प्रबंधित किया जा सके।‘‘
ऑटो, होम लोन और एलएपी श्रेणियों में मामूली रूप से बढ़ोतरी नजर आती है
यात्री वाहन की बिक्री में छाई सुस्ती ऑटो ऋण वृद्धि को प्रभावित करती रही और भारत के समग्र उपभोक्ता ऋण बाजार पर एक दबाव के रूप में काम करती रही।
ऑटो लोन बैलेंसेज 2019 की दूसरी तिमाही में 10.9 वृद्धि हुई, जो कि 2018 की दूसरी तिमाही की  सालाना आधार पर 23.3 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है। 2019 की दूसरी तिमाही में ऑटो ऋणों ने 2019 में सभी प्रमुख ऋण देने वाली श्रेणियों में सबसे धीमी विकास दर दर्ज की। पीएसयू और पीवीटी उधारदाताओं के बैलेंस-लेवल ऑटो डिलिंगक्वंसी में 2019 की दूसरी तिमाही में सुधार दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि कम जोखिम वाले उधारकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एनबीएफसी की  डिलिंगक्वंसी सालाना आधार पर 7बीपीएस दर से बढ़ी। विंटेज विश्लेषण ने एनबीएफसी की  डिलिंगक्वंसी में सभी जोखिम स्तरों पर वृद्धि देखी (़114 बीपीएस)। एनबीएफसी विंटेज डिलिंगक्वंसी में वृद्धि 2.5 लाख रुपए (़164 बीपीएस) से छोटे ऋणों के लिए तेज रही, जो एनबीएफसी ऑटो ऋण का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा है।
हाउसिंग मार्केट की बात करें, तो युवा पीढ़ी के बीच खरीदने की सामर्थ्य की कमी के कारण 2019 की दूसरी तिमाही में समग्र घरेलू खरीद अत्यंत सीमित रही, जिसके परिणामस्वरूप ऋण की वृद्धि सीमित है। 2019 की दूसरी तिमाही में ऑरिजिनेशंस वॉल्यूम्स और बैलेंस में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, और संभावना है कि बाजार में नरमी का यह दौर आगे भी जारी रहेगा, हालांकि होम लोन में गिरावट में मामूली सुधार भी दर्ज किया गया।
2019 की दूसरी तिमाही में कुल होम लोन शेष राशि 14.5 प्रतिशत बढ़ी, जो कि 2018 की दूसरी तिमाही में 20.6 प्रतिशत सालाना वृद्धि की तुलना में काफी कम है। इस अवधि में एनबीएफसी होम लोन की शेष राशि 2018 में 24.1 प्रतिशत की तुलना में इस बार 13.6 फीसदी तक धीमी हो गई है। उत्पत्ति की मात्रा में 2019 की दूसरी तिमाही में 11.9 फीसदी की गिरावट आई। ऑरिजिनेशंस बैलेंसेज में भी गिरावट का दौर जारी रहा (6.3 प्रतिशत की कमी), एनबीएफसी लेंडर्स के बैलेंस में भी 2019 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 17.9 फीसदी की कमी रही, जबकि 2018 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 16.3 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई थी।
 केलकर ने कहा, ‘‘पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2019 की दूसरी तिमाही में बैलेंस डिलिंगक्वंसी में 3 बीपीएस के सुधार के साथ यह 1.68 प्रतिशत पर पहुंचा। पीएसयू उधारदाताओं के लिए 34 की दर में सुधार हुआ, जबकि पीवीटी लेंडर्स के लिए डिलिंगक्वंसी 3 बीपीएस के मामूली सुधार के साथ अनिवार्य रूप से सपाट रही। इस अवधि में एनबीएफसी पोर्टफोलियो ने सालाना आधार पर 29 बीपीएस की वृद्धि देखी।‘‘
प्रॉपर्टी मार्केट में खराब सेंटीमेंट से प्रॉपर्टी के खिलाफ लोन (एलएपी) में क्रेडिट ग्रोथ नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप, उत्पत्ति घटती रही।
एलएपी बैलेंसेज में 2019 की दूसरी तिमाही में 16.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि 2018 की दूसरी तिमाही में यह वृद्धि 26.4 फीसदी थी। यह स्थिति पीएसयू लैंडर्स की एलएपी बैलेंसेज में गिरावट का कारण बनी, जो 2019 की दूसरी तिमाही में 14.9 प्रतिशत तक आ गया, 2018 की दूसरी तिमाही में 35.4 फीसदी। 2019 की दूसरी तिमाही में ऑरिजिनेशन बैलेंसेज में 20.9 प्रतिशत की गिरावट रही।
 केलकर आगे कहते हैं, ‘‘बाजार के दबाव ने एलएपी उत्पत्ति की संरचना में बदलाव किया है। पीएसयू और एनबीएफसी के बैलेंसेज में क्रमशः 31 फीसदी और 36 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि उसी समय पीवीटी उधारदाताओं द्वारा उत्पन्न शेष राशि 12 प्रतिशत बढ़ी। इसने एलएपी उत्पत्ति की पीवीटी हिस्सेदारी को 2019 की दूसरी तिमाही में 37 प्रतिशत पर पहुंचा दिया, जबकि 2018 की दूसरी तिमाही में यह 26 प्रतिशत था।‘‘
एलएपी ने प्रमुख उपभोक्ता ऋण उत्पादों के बीच पिछले एक साल में सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि देखी। 2019 की दूसरी तिमाही में बैलेंस-लेवल डिलिंगक्वंसी रेट्स 25 बीपीएस बढ़कर 3.47 प्रतिशत हो गया, जो पीएसयू, पीवीटी और एनबीएफसी लेंडर्स में क्रमशः 29, 27 और 49 बीपीएस की बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह डिलिंगक्वंसी मुख्य रूप से 1 करोड़ रुपए से अधिक के ऋणों में हुई है।
 केलकर ने कहा, “भारतीय उपभोक्ता ऋण बाजार में अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक दर से विस्तार जारी है, लेकिन उस विस्तार से जुड़ी मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण सहित असुरक्षित उत्पादों के लिए उत्पत्ति और संतुलन वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा उच्च-जोखिम वाले उधारकर्ताओं के लिए है। हालांकि समग्र रूप से डिलिंगक्वंसी की दरें स्थिर बनी हुई हैं, बाजार में उच्च जोखिम के संकेत हैं जो उधारदाताओं को समझना चाहिए और अपनी रणनीतियों को प्रभावी ढंग से समायोजित करने के लिए समायोजित करना चाहिए।‘‘
उन्होंने कहा, ‘‘आज के चुनौतीपूर्ण बाजार में, यह महत्वपूर्ण है कि अपने पोर्टफोलियो की बेहतरी को समझने के लिए ऋणदाता तेजी से परिष्कृत विश्लेषण करते हैं, जैसे कि विंटेज विश्लेषण। इस तरह के विश्लेषण से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि संस्थाएं स्वीकार्य जोखिम के साथ खातों का अधिग्रहण करें, ऋण हानि के भंडार को बारीकी से प्रबंधित करें और उचित मूल्य निर्धारण को समायोजित करें।‘‘

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