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Friday, November 29, 2019

देश अपनायें ने एक्टिजेन कंटेस्ट शुरू किया; देश भर के हजारों स्कूलों में आयोजित होगा

                                                                                                                                                     
                                                                                                                                                   





नई दिल्ली। देश अपनायें एस फाउंडेशन (इनाम समूह के सह-संस्थापक और चेयरमैन) के संस्थापक, चीफ मेंटर, वल्लभ भंसाली ने कहा, ‘‘मुझे एक्टिजेन कंटेस्ट की घोषणा करते हुए बेहद खुशी महसूस हो रही है। यह कंटेस्ट भारत के हजारों स्कूलों में शुरू किया जायेगा, जिसका राष्ट्रीय महत्व का एक ही लक्ष्य हैः सजग, समझदार और सक्रिय नागरिकों का निर्माण। इसमें विद्यालयों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और अभिभावकों को आमंत्रित किया जायेगा, जो 7वी, 8वीं और 9वीं कक्षा के किशोर छात्रों को इस दो चरणों वाले कंटेस्ट में भाग लेने और आसपास की समस्याओं के लिए प्रभावी स्वैच्छिक कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करेंगे। इस द्विचरणीय कंटेस्ट के जरिए उनकी नागरिक समझ की जांच. की जायेगी। यह वार्षिक विशेषता होगी।
 भंसाली ने आगे बताया, ‘‘हमने देश भर में एक्टिजेन कंटेस्ट शुरू किया है, ताकि छात्रों को यह बताने मदद मिल सके कि लोकतंत्र के मूल्य को कैसे अभ्यास लें और इस प्रकार डेमोक्रेसी 2.0 शुरू किया जा सके - जिसमें कम उम्र वाले एक्टिजेन्स यह जान सकेंगे कि वो स्वयं को कैसे सशक्त बनायें ताकि बेहतर भविष्य हेतु श्रेष्ठ परिणाम हासिल करने के लिए सरकार के साथ काम कर सकें।’’

एक्टिजेन कंटेस्टः एक्टिजेन (आर) प्रतियोगिता संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहचाने गए कुछ सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े विषयों के साथ दो-चरण की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हुए, पूरे भारत के कई हजार स्कूलों तक पहुंचेगी।

प्रतियोगिता से छात्रों को न केवल उनके शैक्षणिक बल्कि व्यावहारिक कौशल का भी परीक्षण करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए चुनिंदा छात्र मंथन करेंगे और ग्रैंड जुरी के सामने स्केेलेबल समाधानों को डिजाइन करेंगे।
ऽ सभी गतिविधियां आसान, रोमांचक हैं, किसी भी तैयारी की आवश्यकता नहीं है, और इन्हें अनुसंधान के आधार पर डिजाइन किया गया है। और प्रतियोगिता कई तरह से लाभदायक है।
ऽ ग्रैंड जूरी राउंड के शीर्ष 3 विजेता हिंदी फीचर फिल्म दंगल की फिल्म निर्देशन टीम की निगरानी में बनने वाली फिल्मों में काम करेंगे।
ऽ छात्रों को उनके प्रयासों के लिए मान्यता प्राप्त होगी और प्रमाण पत्र और पुरस्कार जीतने का मौका मिलेगा।
ऽ शिक्षकों को ‘यंग एक्टिजेन मेंटर’ अवार्ड्स दिये जायेंगे।
ऽ स्कूलों को उत्कृष्ट भागीदारी के लिए ट्रॉफी मिलेगा।
ऽ और यह स्कूल के प्रधानाध्यापकों को भविष्य की तैयार पीढ़ी बनाने की संतुष्टि देगा, और उनके स्कूल को एक घूर्णन एक्टिज़न ट्रॉफी जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर चमकने का मौका मिलेगा।
प्रख्यात खेल आइकन और पद्मश्री पुरस्कार विजेता गगन नारंग, जिन्होंने 2012 में शूटिंग के लिए कांस्य पदक के साथ भारत को ओलंपिक पदक दिलाया, ने कहा, “देश अपनायें फाउंडेशन द्वारा स्कूली छात्रों के लिए आयोजित एक्टिजेन प्रतियोगिता उन्हें कम उम्र से ही सही मायने में लोकतंत्र का अनुभव कराने और सतर्क रहने में मदद करेगी। मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित हूं और इसका पूरा समर्थन करता हूं।’’
 नारंग ने आगे कहा, “मेरा खुद का अनुभव है कि युवा बहुत कुछ कर सकते हैं यदि उन्हें एक संरचना और समर्थन दिया जाए। अगर हमारे किशोर इसे एक्टिजेन कॉन्टेस्ट के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं, तो उन्हें पूरे दिल से इसमें भाग लेना चाहिए। यह बहुत ही फायदेमंद होगा और हमारे देश की भी मदद करेगा। ये मूल्य ही दुनिया को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। जय हिन्द।“
डॉ. पार्थ जे शाह, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के संस्थापक और अध्यक्ष और इंडियन स्कूल ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी के निदेशक, “नागरिकता शिक्षा, स्वयंसेवा और सामुदायिक कार्य के साथ संयुक्त होने पर अच्छी नीतियां और शासन महत्वपूर्ण रूप से एक राष्ट्र को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले 25 वर्षों से एक शिक्षाविद् और पॉलिसी एक्टिविस्ट के रूप में, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भारत के हजारों स्कूलों में ऑन-बोर्डिंग छात्र, एक्टिजेन® प्रतियोगिता एक बेहतर भारत के लिए सतर्क, सूचित और सक्रिय युवा नागरिकों को बनाने और एकजुट करने के लिए गेम-चेंजिंग मिशन हो सकते हैं। “
एचवीबी ग्लोबल एकेडमी की पिं्रसिपल डॉ. सुश्री पाठक ने कहा, “एक पिं्रसिपल के रूप में, मैं अपने छात्रों को बाहरी लोगों के साथ मिलकर ऐसे मूल्यों को विकसित करने के सबसे व्यावहारिक और रोमांचक तरीके कोे उजागर करने के लिए तत्पर हूं, जैसे कि, सहयोगात्मक तरीके से प्रतियोगिता, समस्या समाधान और व्यावहारिक गतिविधि।“



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