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Monday, January 27, 2020

जयपुर के निर्यातकों ने जलवायु को सुधारने का संकल्प लिया






जयपुर। " चेंज द क्लाइमेट" तेजी से बढ़ती पर्यावरण चुनौतियों से निपटने के लिए एक सकारात्मक और कार्यवाही उन्मुख अभियान है । यह अभियान लोगों और प्रकृति के बीच सकारात्मक संबंध बनाने की  कल्पना करता है। अर्थवॉर्म  इंडिया जलवायु स्थिरता के लिए सकारात्मक समाधान खोजने के लिए व्यवसायिक पेशेवरों, समाजसेवी, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सरकारी विभागों के अधिकारियों, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, स्कूलों के बच्चों और वयस्कों, पंचायत सदस्यों, किसानों, युवाओं और महिलाओं सहित प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाता है।
" चेंज द क्लाइमेट" जयपुर सार्थक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए अर्थवॉर्म  इंडिया  की एक प्रमुख पहल है जिसमेकड़ी निगरानी के साथ स्वस्थ अस्तित्व दर के साथ गुणवत्ता वाले पेड़ लगाने सुनिश्चित किये जाते है।
यह हरियाली को बढ़ाने, और प्राकृतिक संसाधनों को बनाए रखने में बड़े पैमाने पर समाज के बीच जिम्मेदारी की भावना पैदा करने के लिए किया जा रहा है। जयपुर कलात्मक फर्नीचर और ऐथनिक / पारंपरिक हस्तशिल्प के बड़े केंद्र के रूप में उभरा है। जयपुर का हस्तशिल्प निर्यात उद्योग सामान्य रूप से राज्य की अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए पावर हाउस बन गया है। निर्यात की उच्च क्षमता के लिए राजस्थान का हस्तशिल्प क्षेत्र आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे देश को प्रति वर्ष लगभग 3000 करोड़ रुपये की मूल्यवान विदेशी मुद्रा की कमाई होती है । हर चीज का एक मूल्य चुकाना पड़ता  है। उच्च मांग को पूरा करने के लिए, हालांकि, पेड़ों को तेज गति से काटा जा रहा है  लेकिन नए पेड़ उसी अनुपात में नहीं लगाए जा रहे है।किसान एग्रोफोरेस्ट्री मॉडल में रुचि खो रहे हैं और मोनोकल्चर फसलों पर निर्भर हो रहे हैं। इस प्रकार यह आवश्यक है कि व्यवसाय और पर्यावरण स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता और आपूर्ति के बीच एक व्यवहार्य संतुलन बनाए रखा जाए।
अर्थवॉर्म  इंडिया अपने प्रमुख अभियान “ चेंज द क्लाइमेट” के माध्यम से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 250 गाँवो में 2000 से अधिक किसानों के साथ मिलकर काम कर रहा है, इस अभियान के अंतर्गत 2 लाख से अधिक पौधे वितरित करके कृषि- वानिकी को बढ़ावा दिया गया है। 2020 वर्ष  के लिए, हमने जयपुर में कई हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों के समर्थन के साथ 300000  से अधिक पौधे लगाने की योजना बनाई है।
हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि “प्रकृति हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली सम्पदा नहीं है; यह एक ऋण है जिसे हमने अपनी भावी पीढ़ी से उधार लिया है। हम मानव जाति के सामने आने वाली पर्यावरणीय चुनौतियों के बारे में जानते हैं। पेड़ लगाना एक सरल उपाय है जो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन ला सकता है। उसी समय यह कच्चे माल की उचित आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। यह समय हमारी जिम्मेदारी को स्वीकार करने का है और बिना समय बर्बाद किए  सुधारात्मक उपाय करने का  है ” नरेश चौधरी, अर्थवॉर्म  इंडिया के कंट्री मैनेजर, ने बताया।
अर्थवॉर्म इंडिया के हेड ऑफ़ प्रोग्राम्स, गौरव कौशिक ने कहा, “इस असंतुलन को दूर करने के लिए एग्रोफोरेस्ट्री एक उचित समाधान है। हम भारत में एग्रोफोरेस्ट्री की पुरजोर सिफारिश करते हैं, इस महत्वपूर्ण अभ्यास को हमने एक विशेष अभियान बनाया है , जिसका नाम है 'चेंज द क्लाइमेट'।
संकेत बोंद्रे, परियोजना अधिकारी, अर्थवॉर्म  इंडिया ने बताया की  "'चेंज द क्लाइमेट" किसानों के लिए, किसानों के द्वारा और किसानों के साथ के सिद्धांत पर आधारित है। उच्च गुणवत्ता वाली नर्सरी गाँवों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पूरी तरह से संचालित और प्रबंधित की जाती हैं  ।
हेरिटेज के आशीष रानीवाला कहते हैं, “अगर हम चाहते हैं कि हमारे कारोबार लम्बे समय तक चलें तो हमें अपने कच्चे माल के साधनों का ध्यान रखना होगा। हम "चेंज द क्लाइमेट" अभियान से जुड़कर बहुत खुश हैं क्योंकि अब हम कई किसानों के साथ जुड़ सकते हैं कि एग्रोफोरेस्ट्री का महत्व हम में से हर एक को अच्छी तरह से समझ में आता है। वास्तव में, हम इस खबर को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर प्रसारित कर रहे हैं ताकि हमारे साथी निर्यातकों को भी इस अभियान में शामिल होने का आग्रह किया जा सके। ”



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