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Monday, February 3, 2020

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने हैकाथॉन का आयोजन किया


Toyota



नई दिल्ली, अभिनव सुरक्षा समाधान पेश करने की टोयोटा की प्रतिबद्धता से तालमेल में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) ने सड़क सुरक्षा पर तीसरे टोयोटा हैकाथॉन की अवधारणा बनाकर उनका आयोजन किया है। यह आयोजन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (आईआईटी) में किया गया। इसमें दिल्ली के स्कूलों के कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों ने हिस्सा लिया और इसका लक्ष्य “शून्य मौत” के राष्ट्रीय मिशन के समर्थन में डिजिटल सड़क सुरक्षा समाधान का विकास करने की सघन चुनौती को पूरा करना है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने इस सड़क सुरक्षा पहल का आयोजन इंडियन रोड सेफ्टी कैमपेन के साथ मिलकर किया है। इसका मकसद एक प्रभावशाली जागरूकता पैदा करना है और यह अनूठी पहल एक ऐसा मंच मुहैया कराती है जहां युवा मस्तिष्क को प्रेरित और मोटिवेट किया जाता है कि वे सड़क सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करें और प्रभावी डिजिटल सड़क सुरक्षा समाधान का विकास कर जिम्मेदार सुरक्षा एम्बैसडर बनें।
इस मौके पर कई जाने-माने एथलीट, भारतीय कलात्मक जिमनास्ट, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता दीपा कर्माकर के साथ कमल सिंह, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल कौमपैक्ट नेटवर्क इंडिया, विक्रम गुलाटी, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, वाह्य मामले, कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और जनसंपर्क के साथ कई अन्य सरकारी अधिकारी और टीकेएम तथा आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। 
हैकाथॉन के टॉप परफॉर्मर का चुनाव जाने-माने निर्णायकों के एक विशिष्ट निर्णायक मंडल ने किया। इसमें भिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, कॉरपोरेट, मीडिया, परिवहन, सरकार, पुलिस और टोयोटा एक्सपर्ट शामिल हैं। उत्साहपूर्ण भागीदारी और सड़क सुरक्षा की चुनौतियों के लिए स्मार्ट समाधान पेश करने हेतु प्रेरित करने के लिए सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए।
यह आयोजन प्रतिष्ठा वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी, दिल्ली में किया था। संस्थान ने टोयोटा, भाग लेने वाले स्वयंसेवकों, मेनटॉर को समर्पित समर्थन दिया और सड़क सुरक्षा हैकाथॉन के आयोजन के लिए कैम्पस की सुविधा मुहैया कराई।
हैकाथॉन प्रोग्राम के शुरुआती चरण में भाग लेने वाली नई दिल्ली के स्कूलों की 500 टीम के लिए एक बुनियादी ऑनलाइन ऐप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन किया गया था। 50 सर्वश्रेष्ठ टीम को चुनने के लिए तीन चरणों की स्क्रीनिंग की गई थी। चुनी गई, शिखर की इस 50 टीम को और प्रशिक्षण दिया गया तथा बुनियादी तकनीकी कौशलों पर मेनटर किया गया। यह सब आवश्यक संसाधन के साथ किया गया ताकि हैकाथॉन के दौरान उनकी सहायता की जाए। प्रत्येक टीम को अपने अभिनव आईडिया पर काम करने के लिए 36 घंटे दिए गए और इस प्रक्रिया के दौरान  विशेषज्ञों से दिशानिर्देशन तथा मेनटरिंग भी उपलब्ध था ताकि आखिरकार सड़क सुरक्षा समाधान के रूप में एक प्रोटोटाइप या ठोस आईडिया तैयार हो सके। टीकेएम इन आईडियाज पर आगे काम करेगा और छात्रों को सुझाए गए लागू करने योग्य समाधान का विकास करने तथा निखारने में मदद करेगा।
इस अनूठी पहल पर अपने विचार साझा करते हुए यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल कांपैक्ट नेटवर्क इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और मुख्य अतिथि कमल सिंह ने कहा, “सड़क दुर्घटनाओं से ना सिर्फ पीड़ित के परिवार को ट्रॉमा (अभिघात)होता है बल्कि देश को भारी आर्थिक नुकसान होता है।इसलिए छोटे स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा से संबंधित अभियान से जोड़ना जरूरी है ताकि वे सड़क सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों को समझें। सड़क सुरक्षा के प्रति एकदम जमीनी स्तर पर सकारात्मक व्यवहार का विकास करना महत्वपूर्ण है ताकि युवा पीढ़ी के लिए सुरक्षित सड़क सुनिश्चित की जा सके। भारत में सड़क सुरक्षा को बेहतर करने के लिए इन छोटे बच्चों द्वारा अलग किस्म के डिजिटल समाधान का विकास किए जाने को देखना बहुत अच्छा था। भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए युवाओं द्वारा अभिनव प्रोग्राम तैयार करने और इसके लिए सुरक्षा के मामले में अग्रणी टोयोटा को आगे आते देखना वाकई अच्छा लगता है। हम और भी कॉरपोरेट्स से आग्रह करेंगे कि इस आंदोलन का भाग बनें और सरकार के साथ गठजोड़ करें ताकि मोबिलिटी (आवा-जाही) को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।”
इस अनूठी पहल के बारे में बताते हुए आयोजन की सम्मानित अतिथि भारतीय कलात्मक जिमनास्ट, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता दीपा कर्माकरने कहा, “युवा प्रतिभाओं की जोरदार प्रतिक्रिया को देखते हुए हमें यह शक्ति मिलती है कि भविष्य की पीढ़ी के लिए सुरक्षित कल बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। यह पहल नई प्रौद्योगिकी से संबंधित सड़क सुरक्षा पर केंद्रित चर्चा को प्रेरित करने और इस मामले से निपटने के लिए समाधानों की रेंज का विस्तार करने का अच्छा तरीका है। इस तरह युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और सड़क सुरक्षा के उद्देश्य के लिए योगदान करने में सहायता मिलती है। इस मौके पर मैं टोयोटा का आभार जताउंगी कि उसने इस हैकाथॉन का आयोजन किया और इससे छात्रों को जोड़ा ताकि वे अभिनव समाधान का विकास कर सकें और सड़क सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया गया ताकि भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।”
सभी भागीदारों को बधाई देते हुए श्री विक्रम गुलाटी, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, वाह्य मामले, कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और जनसंपर्क ने कहा,“टोयोटा में हम सभी लोगों के लिए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता है और हमारा मानना है कि सुरक्षा की एक व्यवस्था तैयार करने में प्रत्येक नागरिक अपने आयु वर्ग से अलग, एक मुख्य भूमिका निभाता है। 2007से टोयोटा अपनी भिन्न सड़क सुरक्षा पहल और अखिल भारतीय अभियान के जरिए लगातार और सक्रिय रूप से स्टेकधारकों से जुड़ा रहा है।
अपने किस्म की इस पहल का आयोजन इंडियन रोड सेफ्टी कैमपेन के साथ मिलकर किया गया और यह ज्ञान, प्रतिभा तथा टेक्नालॉजी का मेल है और यह सड़क सुरक्षा के उद्देश्य की सहायता के लिए है। देश के सर्वश्रेष्ठ युवा मस्तिष्क और आईआईटी के छात्रों तथा फैकल्टी की सहायता तथा छात्रों की मेनटरिंग से हम लागू करने योग्य समाधान का विकास करने की कोशिश कर रहे हैं जो भारतीय सड़कों पर आज हम जिन गंभीर चिन्ताओं का सामना कर रहे हैं उन्हें दूर करने में सहायता कर सकते हैं। बच्चे देश के भविष्य हैं और उन्हें शुरू में ही जोड़ लेना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनमें जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाने और सड़क पर सुरक्षित व्यवहार करने वाले स्वभाव का विकास करने में सहायता मिलती है। इस मौके पर हम विजेताओं को बधाई देते हैं और भाग लेने वाले सभी लोगों के प्रति  उनके प्रयासों के लिए आभार जताते हैं। हमें यकीन है कि आज पेश किए गए समाधान हमें प्रभावी ढंग से यातायात में शून्य मौत का अपना लक्ष्य हासिल करने और इसे मजबूत करने में हमारी प्रभावी सहायता करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “इस प्रतिबद्धता को सड़क सुरक्षा की दिशा में एक कदम आगे ले जाते हुए टोयोटा ने अपनी ग्लोबल कॉरपोरेट पहल, स्टार्ट योर इम्पॉसिबल (एसवाईआई) शुरू की है। इसका अंतिम लक्ष्य यातायात दुर्घटना में मौत की संख्या शून्य करना है। इस तरह की पहल के जरिए टोयोटा हर किसी के लिए एक सुरक्षित, ज्यादा स्थायी  और मोबाइल विश्व हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
“स्टार्ट योर इम्पॉसिबल” एक ऐसा समावेशी और स्थायी समाज बनाने में सहायता करने की टोयोटा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसमें हर कोई अपने असंभव को चुनौती दे सकता है। एसवाईआई अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी और अंतरराष्ट्रीय पैरालिमिपक कमेटी के साथ टोयोटा की विश्वव्यापी साझेदारी से भी प्रेरित है ताकि ओलंपिक और पैरालिम्पिक एथलीट की संघर्ष की भावना पर प्रकाश डाला जा सके जो लगातार अपने “असंभव” को चुनौती देते हैं।



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