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Friday, April 12, 2019

फोर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल पल्मोनरी रूट ट्रांसफर करने वाला राज्य का पहला हॉस्पिटल बना


 First Pulmonary Root Transfer Surgery in Rajasthan Fortis


जयपुर। फोर्टिस अस्पताल ने एक और उपलब्धि हासिल की और ऐसा करने वाला शहर का पहला अस्पताल बना, इसने ढाई साल के बच्चे मनीष की पल्मोनरी रूट ट्रांसफर सर्जरी (पीआरटी) की है। मनीष वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) और पल्मोुनरी स्टेनोसिस (पीएस) के साथ ट्रांसपोजीशन ऑफ  ग्रेट आर्टरीज (टीजीए) के संक्रमण से पीडि़त है, यह बीमारी जन्मजात रोगों का एक दुर्लभ और जटिल मिश्रण है, जो हृदय रोगों से पीडि़त केवल 2 प्रतिशत बच्चों में पाया जाता है।

मनीष को सांस लेने में तकलीफ और कम खाने की समस्या की वजह से अस्पताल में लाया गया था, और यहां पर टीजीए वीएसडी पीएस का निदान किया गया जो हृदय और फेफड़ों के कामकाज में बाधा डालता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पा रही थी और परिणामस्वरूप पूरा शरीर नीला पड़ गया था। जागरुक परिवार और फोर्टिस हॉस्पिटल के कुशल शिशु रोग चिकित्सकों के ठोस प्रयासों के लिए धन्यवाद, जिसकी वजह से मनीष की दुर्लभ सर्जरी हुई और वह पूरी तरह से ठीक हो गये। 

पहले निदान में एक निश्चित अंतराल के बाद तीन से चार ऑपरेशन की आवश्यकता होती है जो रोगी और उसके परिवार पर वित्तीय जोखिम, भावनात्मक आघात, स्वास्थ्य जोखिम जैसे अनावश्यक बोझ डालते हैं। स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में हो रहे निरन्तर तकनीकी विकास के चलते फोर्टिस हॉस्पिटल में राज्य का पल्मोनरी रुट ट्रांसफर (पीआरटी) सर्जरी से अवगत करवाया तथा एक ही बार में सर्जरी कर शिशु को नया जीवन दिया।

‘‘दुनियाभर में कई रोगी पल्मोनरी रूट ट्रांसफर (पीआरटी) का लाभ उठा रहे हैं और हमें राजस्थान में इस विश्वस्तरीय सर्जिकल प्रक्रिया को शुरू करने पर गर्व है। जोखिम कारकों को कम करने और तेजी से ठीक होने की संभावना को बढ़ाने के लिए इस संवेदनशील मामले में एक बेजोड़ प्रक्रिया प्रशासित की गई थी। भारत में, हृदय रोगों से पीडि़त प्रत्येक 100 बच्चों में, 2 बच्चे टीजीए वीएसडी पीएस से पीडि़त हैं, यह एक गंभीर मुद्दा है, खासकर जब इसके निदान की बात आती है। इससे पहले, ऐसी स्थितियों का इलाज करने के लिए 3 से 4 सर्जरी की आवश्यकता होती थी, जिसमें कई साल लग जाते हैं, जिसके कारण विशेष रूप से परिवारों के लिए बहुत कठिनाई होती थी। पीआरटी ने इसे काफी हद तक कम कर दिया। सर्जरी के दौरान, हमें किसी भी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा और 7-8 दिनों में मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. सुनील के. कौशल, डॉयरेक्टर, पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल, जयपुर ने ये बातें कहीं। 

ट्रांसपोजीशन ऑफ ग्रेट ऑर्टरीज एक जन्मजात हृदय समस्या है जो गर्भावस्था के पहले 8 हफ्तों के दौरान भ्रूण के दिल के असामान्य विकास के कारण होता है। यह बड़ी वाहिकाओं से संबंधित होता है जो हृदय से फेफड़ों और शरीर तक रक्तको पहुंचाते हैं। ट्रांसपोजीशन एक ऐसी स्थिति बनाता है जहां सिस्टमैटिक यानी प्रणालीगत (शरीर के लिए) और पल्मोनरी (फेफड़ों के लिए) परिसंचरण श्रृंखला के बजाय समानांतर (पैरेलल) स्थिति में होते हैं, जिससे शरीर में ऐसी स्थिति पैदा होती है। दिल से संबंधित इस तरह की स्थिति एक के बाद दूसरी के रूप में बदतर होती जाती है। ट्रांसपोजीशन वाले लगभग 25 प्रतिशत बच्चों में एक वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) भी होता है और यह लगभग एक तिहाई में होता है, कोरोनरी धमनियों का विभिन्न शाखाओं में बंट जाने का पैटर्न असामान्य है। ऐसे मामलों को पल्मोनरी वाल्व के नीचे संकीर्ण होने की स्थिति के लिए जाना जाता है जो बाएं वेंट्रिकल से फेफड़ों तक रक्तके प्रवाह को अवरुद्ध करता है।

‘‘पल्मोनरी रूट ट्रांसफर सर्जरी के बाद, 80 से 90 प्रतिशत बदलाव होते हैं, जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होगी। हम प्राकृतिक ऊतकों का उपयोग करते हैं, अर्थात रोगी के अपने वाइबियल टीश्यू पीआरटी में प्रयोग होते हैं, जबकि पहले की सर्जरी में कृत्रिम सामग्रियों का उपयोग किया जाता था। पीआरटी की प्रक्रिया के बाद, रोगी एक नियमित जीवन जी सकता है, जो पहले की सर्जरी में संभव नहीं था क्योंकि मरीजों को अक्सर उनके आसपास के लोगों में फैली गलत अवधारण के कारण सामाजिक रूप से विकलांग समझा जाता था और वे उस बच्चे के साथ अपने बच्चों को खेलने या खाने की अनुमति भी नहीं देते थे और इसका परिणाम बच्चे पर हमेशा नकारात्मक होता था। हम राजस्थान में इस सर्जरी को शुरू करने वाले पहले व्यक्ति हैं और सकारात्मक सुधार ने हमारी उपलब्धियों  में एक और कीर्तिमान को स्थापित कर दिया है। डॉ. कौशल ने ये बातें भी कहीं। 

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