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Tuesday, July 2, 2019

एशिया पेसिफिक में कॉमर्शियल रियल एस्टेट मालिक पर्यावरण के बढ़ते जोखिम के मद्देनज़र प्रत्यास्थता को दे रहे हैं महत्व





कॉमर्शियल रियल एस्टेट को सुरक्षित एवं प्रत्यास्थ बनाने के लिए प्रॉपर्टी प्रबंधकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी 


नई दिल्ली। एशिया पेसिफिक कॉमर्शियल प्रॉपर्टी मालिक एवं प्रबंधक दीर्घकालिक पर्यावरणी चुनौतियों के मद्देनज़र इमारतों को अनुकूल बनाने के लिए बेहतर संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इमारतों के मालिकों, किराएदारों, कॉन्ट्रेक्टरों, स्थानीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप उद्योग जगत इस प्रत्यास्थता पर ध्यान केेन्द्रित कर रहा है। सीबीआरई की ग्लोबल रीसाइलेन्स एवं प्रॉपर्टी मैनेजमेन्ट 2019 रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
पर्यावरणी पर बढ़ते दबाव के बारण प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो में प्रत्यास्थता विकसित करना रियल एस्टेट निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। उत्तरदाताओं के अनुसार कॉमर्शियल रियल एस्टेट सम्पत्तियों में प्रत्यास्थता बढ़ाने के लिए इन मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा हैः
पूंजी उत्पादक के रूप में प्रत्यास्थताः इमारतों का पूंजीगत मूल्य बनाए रखना तथा किसी आपदा के बाद संचालन आय के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना।
भविष्य के लिए अनुकूलित पोर्टफोलियाः विश्वस्तरीय निवेशक पूंजी लगाते समय विभिन्न अवसरों तथा प्रत्यास्थता की रणनीतियों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।
सम्पत्ति प्रबंधकों केे साथ साझेदारीः साझेदारियों से इमारत-स्तर पर प्रत्यास्थता बढ़ती है तथा इमारत के मालिक का दीर्घकालिक परफोर्मेन्स बेहतर होता है।
सम्पत्ति की लाईफसाइकल प्रथाओं को बढ़ानाः इस बात पर समझ का विकास हो रहा है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से पहले, दौरान और बाद में विशेष प्रथाओं को अपनाया जा सकता है।
रणनीतियां सम्पत्ति के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैंः रीटेल, ओद्यौगिक एवं डेटा सेंटर सम्पत्तियों को सेक्टर-विशिष्ट प्रत्यास्थता चुनौतियों का सामन करना पड़त है और वे इसके अनुरूप रणनीतियां बनाते हैं।
राजेश पंडित, एमडी, ग्लोबल वर्कप्लेस सोल्यूशन्स एण्ड प्रॉपर्टी मैनेजमेन्ट ने कहा, ‘‘वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के अनुसार मौसम की चरम परिस्थितयां, जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाएं अब दुनिया के तीन प्रमुख जोखिम बन चुके हैं। चूंकि प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम एशिया पेसिफिक और भारत में एक वास्तविकता बन चुका है, ऐसे में निवेशक अपने प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो की भावी सुरक्षा को महत्व दे रहे हैं। व्यापक प्रत्यास्थता योजनाओं के साथ बनी इमारत पर्यावरणी चुनौतियों का बेहतर मुकाबला कर सकती है, जिसका बाज़ार की प्रतिस्पर्धा और निवेश रिटर्न पर सकारात्मक एवं प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।’’
दुनिया भर में शीर्ष पायदान के सम्पत्ति पेशेवरों के साथ किए गए साक्षात्कार दर्शाते हैं कि कॉमर्शियल प्रॉपर्टी मालिक सम्पत्ति प्रबंधकों के साथ साझेदारी में विभिन्न पर्यावरणी चुनौतियों जैसे बढ़ता समुद्र स्तर, तूफ़ान, भूकम्प, जंगल में आग की बढ़ती घटनाओं के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। इसके लिए अपनाई गई रणनीतियां हैंः
अधिग्रहण से पहले जोखिम मूल्यांकन के लिए ड्यू डिलिजेन्स प्रक्रिया।
व्यक्तिगत इमारत के बजाए पूरे पोर्टफोलियो में प्रत्यास्थता का मूल्यांकन।
प्रत्यास्थ्ता के लिए रिपोर्टिंग के नए तरीके अपनाना जैसे जीआरईएसबी तथा संस्थागत निवेशकों के द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एनवायरमेंटल, सोशल एण्ड गवर्नेन्स बेंचमार्किंग।
रियल एस्टेट के स्मार्ट फैसलों को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा आंकड़ों का इस्तमेाल करना, इसके लिए शहर एवं संघीय स्तर पर खतरों के मूल्यांकन के लिए उपकरणों का इस्तेमाल।
स्थानीय चयनित अधिकारियों एवं सुरक्षा लीडरों के साथ सशक्त संबंध बनाना, जिससे पर्यावरणी आपदा के मामले में आपसी तालमेल में सुधार होगा।
रिपोर्ट में जोखिम के मूल्यांकन में संबंधी प्रबंधकों की भूमिका पर भी चर्चा की गई है, इसमें सम्पत्ति की लोकेशन, क्षेत्र एवं नेविगेशन के आधार पर जोखिम का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है।
     



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