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Wednesday, July 24, 2019

येस बैंक ने लॉन्च किया ‘स्मार्ट एज‘ - एमएसएमई के लिए उद्योग का पहला सरोगेट लेंडिंग प्रोग्राम




 YES BANK launches Smart Edge, an industry first surrogate lending program for MSMEs




मुंबई। निजी क्षेत्र में देश के चौथे सबसे बडे बैंक- येस बैंक ने आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों (एमएसएमई) के लिए अपने लेंडिंग प्रोग्राम ‘स्मार्ट एज‘ को लॉन्च करने का एलान किया। इंडस्ट्री में अपनी तरह के इस पहले और अनूठे प्रोग्राम के माध्यम से ओवरड्राफ्ट (ओडी), लैटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) और फाइनेंशियल बैंक गारंटी के रूप में कोई भी एमएसएमई 1 से 3 करोड़ रुपए तक की सुरक्षित कार्यशील पूंजी का लाभ उठा सकता है।

एक येस जीएसटी इनिशिएटिव स्मार्ट एज अपनी तरह का पहला सरोगेट लेंडिंग मॉडल है जिसमें किसी वित्तीय स्टेटमेंट की आवश्यकता नहीं होगी और एमएसएमई के जीएसटी रिटर्न और ऑपरेटिव बैंक खातों से जुटाए गए  डेटा-पॉइंट्स के आधार पर क्रेडिट मूल्यांकन किया जाएगा। बैकग्राउंड में चलने वाला स्कोरकार्ड व्यक्तिगत रूप से दोनों स्रोतों से क्रेडिट संकेतकों का विश्लेषण करेगा। जनरेट किए गए स्कोर के आधार पर कोलेटरल कवर की जरूरत का पता लगाया जाएगा, जो 85 प्रतिशत से शुरू होगा।

स्मार्ट एज की लॉन्चिंग के बारे में जानकारी देते हुए येस बैंक के सीनियर ग्रुप प्रेसीडेंट और हैड- ब्रांच एंड रिटेल बैंकिंग  राजन पेंटल ने कहा, ‘‘देश के विकास और उन्नति में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए येस बैंक ने एमएसएमई सैक्टर को फाइनेंशियल सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के लिए यह नई पहल की है। फाइनेंस तक एमएसएमई की पहुंच को आसान बनाने के लिए हम डेटा और टैक्नोलॉजी की ताकत का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्मार्ट एज प्रोग्राम हमारे ग्राहकों के लिए क्रेडिट की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में कामयाब रहेगा।‘‘

एमएसएमई किसी भी बैंक शाखा के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद येस बैंक का एक प्रतिनिधि आवेदक से संपर्क करेगा। एमएसएमई को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के संदर्भ में केवाईसी के साथ-साथ मूल्यांकन के लिए पिछले 12 महीनों का जीएसटी रिटर्न और ऑपरेटिव बैंक खाता विवरण प्रस्तुत करना होगा। बैंक के लिए कोलेटरल स्वीकार्य को ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में लिया जाएगा।

नई जीएसटी प्रणाली को अपनाने में एमएसएमई की सहायता करने और नए बदलाव से संबंधित परिवर्तनों के प्रभाव को समझने के लिए येस बैंक ने 2018 में ‘येस जीएसटी‘ कार्यक्रम शुरू किया था।

अपने जिम्मेदारीपूर्ण बैंकिंग लोकाचार के अनुरूप येस बैंक एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे एक स्थायी विकास पथ पर लाने के लिए लगातार जोर दे रहा है। इस साल जनवरी की शुरुआत में येस बैंक ने भारतीय एमएसएमई पर डिजिटलीकरण के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए देशभर के 20 उद्योगों में 2,700 एमएसएमई को कवर करते हुए पांच महीने का गहन सर्वेक्षण आयोजित किया था।
‘इम्पैक्ट ऑफ डिजिटाइजेशन ऑन एमएसएमई‘ शीर्षक वाला यह अध्ययन अपनी तरह का एक व्यापक अध्ययन था और इसके तहत एमएसएमई द्वारा उठाए गए डिजिटल कदमों की जानकारी दी गई थी और साथ ही डिजिटल टैक्नोलॉजी को बडे पैमाने पर अपनाने के मार्ग में आने वाली बाधाओं और उनसे निपटने के उपायों पर भी चर्चा की गई थी।
येस बैंक एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और यह बात प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों में से एक एशियामनी द्वारा आयोजित 2018 और 2019 के एशियामनी कंट्री अवार्ड्स 2018 और 2019 में ‘बेस्ट बैंक फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई) - इंडिया‘ के रूप में हासिल मान्यता से भी प्रमाणित होती है। इसी तरह, एशियन बैंकिंग एंड फाइनेंस रिटेल बैंकिंग अवार्ड्स 2018 और 2019 में भी येस बैंक को ‘एसएमई बैंक ऑफ द ईयर- इंडिया‘ सम्मान हासिल हुआ था।




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