द्रव्यवती नदी के संबंध में टाटा प्रोजेक्ट्स ने दिया स्पष्टीकरण - Karobar Today

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Thursday, August 1, 2019

द्रव्यवती नदी के संबंध में टाटा प्रोजेक्ट्स ने दिया स्पष्टीकरण


 Tata Projects reveals truth about Dravyavati River

जयपुर।  टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड का मानना है कि द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट के बारे में कुछ गलतफहमियां हैं, खास तौर पर भूजल स्तर, जल प्रदुषण और कुछ टूटे हुए हिस्सों के बारे में कुछ गलत विचार फैले हुए हैं।  इसलिए यह कंपनी चाहती है कि सुस्पष्ट रूप से पूरा सच सभी के सामने लाया जाना और उन गलतफहमियों को दूर करना अत्यंत आवश्यक है। 


काम के दौरान: द्रव्यवती नदी में 12 किमी के इलाके में स्टोन पिचिंग किया गया है ताकि भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती रहे। 
द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट के बारे में कुछ गलतफहमियां हैं, खास तौर पर भूजल स्तर पर इसके असर के बारे में कुछ गलत बातें फैली हुई हैं।  इसलिए हम चाहते हैं कि सुस्पष्ट रूप से पूरा सच सभी के सामने लाया जाना और उन गलतफहमियों को दूर करना अत्यंत आवश्यक है। 
द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट में स्टोन पिचिंग टेक्निक का इस्तेमाल किया गया है।  करीबन  12 किमी इलाके में विशाल पत्थर एक विशेष तरीके से बिछाए गए हैं। इनमें से हर पत्थर का वजन करीबन 40 किलो है।  यह टेक्निक जमीन में नीचे मिटटी में पानी के अंतःस्रवण को बढ़ाती है।
हर 300 मीटर की दूरी पर एक चेक डैम है, साथ ही 10 मीटर का सछिद्र कॉन्क्रीट हिस्सा है, जोकि यह सुनिश्चित करते है कि भूजल का अधिकतम पुनर्भरण होता रहे।
यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सिर्फ सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट्स द्वारा प्रक्रिया किया गया पानी ही जमीन के भीतर जाएगा ताकि भूजल पुनर्भरण सिर्फ और सिर्फ शुद्ध पानी से ही हो और उसमें किसी भी प्रकार से प्रदुषण न हो।
सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने किए हुए एक दशकीय औसत अभ्यास में पाया गया है कि सन 2008 से राजस्थान में भूजल 62.70% से कम हुआ है।   दशकीय औसत को नवम्बर 2008 से अक्तूबर / नवम्बर 2018 तक गिना गया था - यह वह समय था जब द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन का काम पूरा नहीं हुआ था।   इस अभ्यास में स्थिति का कारण बताते हुए कहा गया है कि "हाल ही के सालों में बारिश कम होने की वजह से कुँए, ट्यूब कुँए और पानी के टैंकर्स की संख्या बढ़ती जा रही है।  इस कारणवश जयपुर और आसपास के इलाकों में भूजल स्तर कम होता जा रहा है।"     
जयपुर और पास वाले इलाकों में रामगढ तालाब की तरह कई तालाब सूखते जा रहे हैं।  रोड़ा, बाणगंगा, ताला और माधोवेनी  ये चार नदियां जो इन तालाबों को पानी देती थी, वह भी सूख चुकी हैं।  2011 में  राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा तालाबों के सूखने के मसले में स्वयं प्रेरणा से हस्तक्षेप करते हुए जांच-पड़ताल शुरू की।  उसके पश्चात यह पाया गया कि 700 वर्ग मीटर के जलग्रहण क्षेत्र पर 405 एनीकट्स (बाँध) और 800 अतिक्रमण हैं, जिनमें फार्महाउसेस से लेकर शिक्षा संस्थान की इमारतें भी शामिल हैं, जिनके कारण तालब सूख रहे हैं। 

अधिकतम भूजल पुनर्भरण को सुनिश्चित करने के लिए 10 मीटर का सछिद्र कॉन्क्रीट सेक्शन


द्रव्यवती रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट शुरू होने के पहले के हालात


सांगानेर ब्रिज के नीचे प्रवाह का दृश्य - रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट शुरू होने पहले


द्रव्यवती नदी - प्रोजेक्ट शुरू होने के पहले और अब 


द्रव्यवती नदी पर रोक बाँध

द्रव्यवती नदी में प्रदूषित पानी असल में आता कहा से है:


प्रताप नगर के पास द्रव्यवती नदी में छोड़ा जा रहा कारखानों का गन्दा मैल


द्रव्यवती नदी का पानी - टाटा प्रोजेक्ट्स के एसटीपी में शुद्धिकरण प्रक्रिया के पहले का प्रदूषित, मैला पानी और एसटीपी में प्रक्रिया के बाद शुद्ध पानी

द्रव्यवती नदी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट्स में शुद्धिकरण प्रक्रिया किए गए पानी की जांच में यह पाया गया है कि यह पानी कॉन्ट्रैक्ट में निर्देशित मानदंडों से भी ज्यादा शुद्ध है। 
जयपुर शहर में जल निकासी व्यवस्था ठीक नहीं है, नालियां ढ़की न होने की वजह से उसमें कई सारा घन कचरा भी डाला जाता है और उसे कही पर भी रोका नहीं जाता।  अंत में यह सारा गन्दा मैल और साथ में घन कचरा भी द्रव्यवती नदी में छोड़ा जाता है, जिससे नहर का भारी नुकसान होता है और वह चोक हो जाता है।  बरसात का पानी बहाकर ले जाने के लिए बनाई गई नालियों में घरों और कारखानों का मैल और घन कचरा डाला जाता है जो आखिरकार आकर नदी में ही गिरता है।  बरसाती नालियों में इस प्रकार से मैल और घन कचरा डालना गलत है और उसकी रोकथाम के लिए नगर प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
द्रव्यवती नदी के पानी में जो काला रंग दिख रहा है उसका मुख्य कारण कारखानों से छोड़ा जा रहा कचरे का गन्दा पानी है।  इंडस्ट्रियल इस्टेट्स और कई अन्य कारखानों से डाइंग के बाद फेकने लायक गन्दा रंग, पानी अनधिकृत तरीकों से सीधे द्रव्यवती नदी, नालियों और इन्स्पेक्शन चेम्बर्स में छोड़ा जाता है।  इससे नहर में बहकर आने वाला पानी प्रदूषित होता है, इसके बुरे असर पूरी नदी को झेलने पड़ रहे हैं।
125 एमएलडी क्षमता का देलावास एसटीपी काम नहीं कर रहा है, इसकी वजह से भारी मात्रा में अशुद्ध पानी, मैल नदी में बहता है।  द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट के तहत पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे एसटीपीज में शुद्ध किया 175 एमएलडी पानी भी देलावास एसटीपी के काम न करने के कारण प्रदूषित हो रहा है।
गन्धनाला इलाके में बढ़ाव के काम में अतिक्रमण और मुकदमेबाज़ी की वजह से देरी हो रही है।  यह अधूरे काम और कुछ जगहों पर जमीन से जुड़ी बाधाओं के कारण अंशतः ही काम हो पाए हैं।   परिणामवश, कूड़ा-कर्कट, मलबा बहकर द्रव्यवती नदी में आया है, इससे रोक बाँध के रेलिंग सुराखे ब्लॉक हुई है और इस जगह पर कॉन्क्रीट लायनिंग भी टूट चूका है।  यह नाला प्रदुषण का प्रमुख कारण है, इसका समाधान अधिकारीयों को ही ढूँढना होगा क्योंकि यह हमारे कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं है।
इसी प्रदूषित पानी को खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इस तरह से हानिकारक प्रदूषक खाद्य-श्रृंखला में प्रवेश करते हैं।  नागरिकों के स्वास्थ्य पर इसके बुरे असर होते हैं।       


देलावास सीवर आउटलेट से बिना शुद्धिकरण प्रक्रिया किए द्रव्यवती नदी में छोड़ा जा रहा गन्दा मैल


कुंदन नगर में द्रव्यवती नदी में छोड़ा जा रहा प्रदूषित, गन्दा मैल
कुछ छोटे टूटे हुए हिस्सों का सच:
27 और 28 जुलाई 2019 को अचानक से भारी बारिश हुई जिसका कोई पूर्वानुमान नहीं था।  भारी बारिश और सामान्य सीवेज की दृष्टी से देखा जाए तो करीबन 200 एमएम बौछाड़ हुई।  जयपुर का कुल भू क्षेत्र 484.6 वर्ग मीटर है, इसका अर्थ है कि बहुत ही कम समय में बिना किसी भी पूर्वानुमान के 96.92 एमसीयूएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) मूसलाधार बारिश हुई।  इसमें से अगर 25% भी बौछाड़ द्रव्यवती नदी में बहकर आती है तो नदी में 24.23 एमसीयूएम इतनी भारी मात्रा में पानी जमा हो जाएगा।  लेकिन अचानक से इतनी भारी बारिश के बावजूद भी द्रव्यवती नदी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए बारिश का सारा अतिरिक्त  पानी बहा दिया और जयपुर को डूबने से बचाया।
कुछ  इलाकों में जमीन से संबंधित कोर्ट स्टे और मुकदमेबाज़ी की वजह से देलावास इलाके के करीब कुछ कुछ जगहों पर काम नहीं हो पा रहा है।  अधूरे काम के दो खुले छोर हैं जो जमीन में मिलते हैं।  बारिश के कारण इस जमीन की मिटटी धीरे धीरे नष्ट होती जाती है और पानी नहर की सीमा के बाहर बहने लगता है, वह नहर के बाँध का और सीमा दीवार का नुकसान करता है।  नहर के काम को लगातार, बिना किसी भी रूकावट के पूरा किया होता तो ये सब नहीं होता, पानी नहर के बाहर नहीं बहता।
नागरिक निश्चिन्त रह सकते हैं क्योंकि द्रव्यवती रिवर रिज्युवनेशन प्रोजेक्ट में दस सालों तक ऑपरेशन  मेन्टेनन्स कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है।  भारी बारिश या अन्य किसी भी कारणवश कोई भी टुटा फूटा  हुआ तो उसकी मरम्मत की जाएगी।


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